अमेरिका के कई रक्षा विश्लेषक अब निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि पिछले दिनों चीन ने जिस हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण किया था, वह अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती है। अब यहां यह अनुमान भी लगाया गया है कि संभव है कि चीन ने ऐसी एक से ज्यादा मिसाइलों का परीक्षण किया हो। जबकि चीन का कहना है कि उसने एक साधारण परीक्षण किया, जिससे चौंकने की कोई बात नहीं है।
अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के खुफिया अधिकारियों ने सीनेट की एक समिति को बताया है कि हाइपरसोनिक मिसाइल का परीक्षण चीन में हुई एक ठोस उन्नति का संकेत देता है। इस क्षमता के साथ चीन अमेरिका पर अपनी तरफ से हमला करने की स्थिति में पहुंच गया है। यानी अब हालत ऐसी नहीं रही कि अगर पहले अमेरिका ने हमला किया, तभी चीन जवाब देगा।
सीएनएन के मुताबिक अमेरिका के कुछ दूसरे विशेषज्ञ खुफिया आधिकारियों के इस आकलन से सहमत नहीं हैँ। उनके मुताबिक चीन ने जिस टेक्नोलॉजी का प्रदर्शन किया है, ऐसा नहीं है कि वह सिर्फ उसके पास हो। यह अमेरिका, रूस और कुछ दूसरे देशों के पास दशकों से मौजूद है। इन विशेषज्ञों के मुताबिक रूस भी कई प्रकार की हाइरपसोनिक मिसाइलों को बनाने में जुटा हुआ है। उन्होंने कहा कि अभी इस टेक्नोलॉजी में कोई देश इतना आगे नहीं है कि वह दूसरे को अस्थिर कर सके।
विशेषज्ञों के मुताबिक हाइपरसोनिक मिसाइलें हालांकि ध्वनि से पांच गुना अधिक गति से चलती हैं, लेकिन ब्लैस्टिक मिसाइलों की रफ्तार उनसे तेज होती है। लेकिन इन मिसाइलों के साथ खास बात यह है कि इन्हें कम ऊंचाई पर रखते हुए दागा जा सकता है। साथ ही बीच में ही उनकी रफ्तार और उनके लक्ष्य में परिवर्तन किया जा सकता है। इसकी वजह से मिसाइल रक्षा प्रणाली से उन्हें रोक पाना अधिक कठिन हो जाता है।