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US: अमेरिकी अदालत ने जाति भेदभाव के मामले में राज्य सरकार की इकाई को दंडित किया, कंपनी पर लगाया था फर्जी आरोप

Thu, 20 Jun 2024 07:27 AM IST
विशांत श्रीवास्तव अमर उजाला, न्यूज डेस्क, वाशिंगटन डीसी

सार

अमेरिकी अदालत ने राज्य सरकार की इकाई पर झूठे जातिगत भेदभाव का आरोप लगाने पर दंडित किया है। कैलिफोर्निया की राज्य सरकार की इकाई सिविल राइट्स डिपार्टमेंट पर सिस्को कंपनी पर जातिगत भेदभाव करने का आरोप लगाया था। 

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कोर्ट फैसला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अमेरिकी अदालत ने कैलिफोर्निया की राज्य सरकार के एक विभाग को जातिगत भेदभाव करने पर आर्थिक दंड का आदेश सुनाया है। मामले में सिस्को पर जातिगत भेदभाव करने और धार्मिक स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने का आरोप लगाया गया था, जो कि गलत साबित हुआ। मामले में भारतीय अमेरिकी प्रबंधकों सुंदर अय्यर और रमाना कोम्पेला की व्यापक तरीके से जांच की गई थी। जिसके बाद कोर्ट ने ये फैसला सुनाते हुए कैलिफोर्निया सिविल राइट्स डिपार्टमेंट (CRD) पर 2 हजार अमेरिकी डॉलर का अर्थदंड लगाया।

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शिक्षाविदों और मीडिया ने आंकड़ों को गलत तरीके से पेश किया
कास्टफाइल्स की संस्थापक ऋचा गौतम ने इस फैसले के व्यापक तरीके से जोर दिया और इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे सिस्को मामले का इस्तेमाल पूरे समुदाय को बदनाम करने कि लिए किया गया था। ऋचा गौतम ने कहा कि सर्वेक्षण के आंकड़ों को शिक्षाविदों और मीडिया ने गलत तरीके से पेश किया। जिसके कारण भारतीय अमेरियों के बीच बड़े पैमान पर जाति भेदभाव की भ्रामक कहानी सामने आई। 

सीआरडी, जिसे पहले निष्पक्ष रोजगार और आवास विभाग (डीएफईएच) के नाम से जाना जाता था। लेकिन विभाग ने गलत तरीके से अय्यर और कोम्पेला को निशाना बनाया और उन्हें जातिगत भेदभाव के अपराधियों के रूप में स्थापित करने की कोशिश की।  हालांकि, एक व्हिसलब्लोअर वेबसाइट ने सीआरडी द्वारा मनगढ़ंत बातों के सबूत उजागर किए, जिससे मामले में सच्चाई सामने आ सकी।
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कास्ट फाइल्स ने कहा कि जिस तरह से सिलिकॉन वैली में चुनौतीपूर्ण कारोबारी माहौल है। उसे देखते हुए यह निर्णय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। जहां रायट गेम्स और टेस्ला जैसी कंपनियों को भेदभाव के आरोपों पर काफी वित्तीय दंड का सामना करना पड़ा है। जबकि अर्थदंड के मामलों में सीडीआर के मध्यस्थता ना करने पर अक्सर आलोचना भी की जाती है।
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