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अमेरिका में कयास: ताइवान पर बाइडन की जुबान फिसली या उन्होंने जानबूझ कर किया ऐसा

Mon, 25 Oct 2021 07:26 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

 व्हाइट हाउस की प्रवक्ता जेन साकी ने कहा- ‘हम नीति में किसी बदलाव की घोषणा नहीं कर रहे हैं, न ही हमने इसमें कोई बदलाव किया है। हम ताइवान रिलेशंस एक्ट से निर्देशित होते हैं।’ ताइवान रिलेशंस एक्ट 1979 में बना था। उस कानून के मुताबिक अमेरिका ताइवान को अपनी रक्षा के लिए हथियार देने के लिए वचनबद्ध है...
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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन - फोटो : PTI (File Photo)
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विस्तार
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ताइवान के बारे में राष्ट्रपति जो बाइडन ने पिछले हफ्ते अचानक जो टिप्पणी कर दी, उसके असर को नियंत्रित करने की कोशिशों में व्हाइट हाउस के अधिकारी अभी भी जुटे हुए हैं। बाइडन ने पिछले गुरुवार को कहा था कि अमेरिका ताइवान की रक्षा के लिए आगे आएगा। लेकिन उसके बाद से व्हाइट हाउस के अधिकारी औपचारिक बयानों और अनौपचारिक रूप से मीडिया ब्रीफिंग में यह सफाई देने में जुटे हुए हैं कि ये बयान चीन के मामले में अमेरिकी नीति में बदलाव का संकेत नहीं है।

ताइवान को अलग देश नहीं मानता अमेरिका

अभी तक अमेरिका की औपचारिक नीति यही है कि वह ताइवान को अलग देश नहीं मानता। उसकी नीति ‘वन चाइना’ की है। यानी वह ताइवान को चीन का हिस्सा समझता है। वेबसाइट द हिल के मुताबिक बाइडन ने ये टिप्पणी मौजूदा हालात के बीच की और इसीलिए उसने तुरंत सबका ध्यान खींच लिया। मौजूदा माहौल पहले से ही तनावपूर्ण है। अमेरिका चीन पर अनुचित व्यापार व्यवहार करने, मानव अधिकारों का हनन करने, कोरोना वायरस की उत्पत्ति पर परदा डालने, और ताइवान के प्रति आक्रामक नीति अपनाने के आरोप लगाता रहा है। इससे तनाव बढ़ा है।

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बाइडन ने उपरोक्त टिप्पणी टीवी चैनल सीएनएन के एक कार्यक्रम में की थी। उनसे पूछा गया था कि अगर ताइवान पर चीन हमला करता है, तो क्या अमेरिका उसकी रक्षा करेगा। इस पर राष्ट्रपति ने कहा- ‘हां, अमेरिका इसके लिए वचनबद्ध है।’ इस पर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई। उसके विदेश मंत्रालय ने कहा कि जहां चीन की संप्रभुता और प्रादेशिक अखंडता का प्रश्न हो, वहां समझौता करने की कोई गुंजाइश नहीं है। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि चीन के पास इनकी रक्षा करने की क्षमता है और वहां के लोग ऐसा ही करेंगे।

एक्ट का दिया रेफरेंस

बढ़ते तनाव के बीच व्हाइट हाउस ने सफाई दी। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता जेन साकी ने कहा- ‘हम नीति में किसी बदलाव की घोषणा नहीं कर रहे हैं, न ही हमने इसमें कोई बदलाव किया है। हम ताइवान रिलेशंस एक्ट से निर्देशित होते हैं।’ ताइवान रिलेशंस एक्ट 1979 में बना था। उस कानून के मुताबिक अमेरिका ताइवान को अपनी रक्षा के लिए हथियार देने के लिए वचनबद्ध है। लेकिन उस कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिससे अमेरिका वहां अपनी सेना भेज सके।

लेकिन वेबसाइट एक्सियोस.कॉम ने अपने एक विश्लेषण में इस तरफ ध्यान खींचा है कि राष्ट्रपति बाइडन एक साल के अंदर दो बार यह कह चुके हैं कि अमेरिका किसी चीनी आक्रमण से ताइवान की रक्षा करेगा। हालांकि दोनों बार यह हुआ है कि व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने बाद में उनके बयान पर लीपापोती करने की कोशिश की। लेकिन अमेरिका के रक्षा विशेषज्ञों का अनुमान है कि चीन अगले चार से छह साल के अंदर ताइवान पर हमला करेगा। इसलिए अभी जो राष्ट्रपति ने कहा है, एक हकीकत बन सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि राष्ट्रपति ने जो बयान दिया, वह ताइवान के प्रति अमेरिकी नीति में बदलाव पर चल रही चर्चा का संकेत हो सकता है।

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अमेरिका के पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मैट पॉटिंगर ने वेबसाइट एक्सियोस से कहा कि भले बाद में व्हाइट हाउस ने कदम पीछे खींच लिए हों, लेकिन ताइवान के बारे में बाइडन के हालिया बयान चीन को अमेरिकी नीति के बारे में स्पष्ट संदेश देने के लिहाज से ‘सहायक साबित हुए हैं।’

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