संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के प्रमुख डेनिस फ्रांसिस ने कहा कि भारत ने डिजिटलीकरण के जरिए लाखों लोगों को गरीबी को बाहर निकाला है। फ्रांसिस रोम में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) में 'वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए भूख को समाप्त करने की दिशा में प्रगति में तेजी' विषय पर बोल रहे थे।
फ्रांसिस ने डिजिटलीकरण के जरिए तेजी से विकास का समर्थन करने के लिए आधार प्रदान करने की जरूरत पर जोर दिया और भारत के उदाहरण का हवाला दिया और सराहना की। उन्होंने कहा, उदाहरण के लिए भारत के मामले को लें। भारत पिछले पांच या छह वर्षों में स्मार्टफोन के जरिए 80 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सक्षम रहा है।
अपने संबोधन के बाद फ्रांसिस संयुक्त राष्ट्र के राजनयिकों, अधिकारियों और नीति विशेषज्ञों के सवालों के जवाब दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत में ग्रामीण इलाकों के किसानों का बैंकिंग प्रणाली के साथ कभी संबंध नहीं था। लेकिन अब सभी अपने कामों को अपने स्मार्टफोन पर करने में सक्षम हैं। जिसमें उनके बिलों का भुगतान करना और ऑर्डर के लिए भुगतान प्राप्त करना शामिल है।
भारत में 80 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने का जिक्र करते हुए फ्रांसिस ने कहा कि भारत में इंटरनेट की पहुंच काफी अच्छी है और लगभग सभी के पास मोबाइल फोन है। वैश्विक दक्षिण के कई हिस्सों में ऐसा नहीं है। फ्रांसिस ने कहा कि डिजिटलीकरण के लिए वैश्विक ढांचे पर बातचीत करने में प्राथमिक कदम के रूप में इस असमानता को दूर करने के लिए कुछ प्रयास और पहल होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, 2009 में भारत में केवल 17 फीसदी वयस्क नागरिकों के पास बैंक खाते थे। 15 फीसदी डिजिटल भुगतान प्रणाली का उपयोग करते थे। जबकि 25 में से एक पास पहचान दस्तावेज था और करीब 37 फीसदी के पास मोबाइल फोन थे। ये संख्या तेजी से बढ़ी है और आज टेलीफोन कनेक्शन तक 93 फीसदी की पहुंच हो गई है, एक अरब से ज्यादा लोगों के पास डिजिटल पहचान दस्तावेज हैं और 80 फीसदी के पास बैंक खाते हैं। 2022 तक प्रति माह 600 करोड़ से ज्यादा डिजिटल भुगतान लेनदेन पूरे किए गए।