अफगानिस्तान में तालिबान का शासन कायम होने के बाद देश के आर्थिक हालत के संकट के मद्देनजर संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की रिपोर्ट चिंता बढ़ाने वाली है। यूएनडीपी ने अपने एक अध्ययन में कहा है कि जून 2022 से शुरू होने वाले अगले वित्तीय वर्ष में देश के सकल घरेलू उत्पाद में 13.2 प्रतिशत तक गिरावट आने का अंदेशा है इससे गरीबी दर 25 फीसदी तक पहुंच सकती है। हालांकि इस संकट की गंभीरता इस बात पर निर्भर करेगी कि विश्व तालिबान से किस तरह का संबंध रखता है और तालिबान की सरकार को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समर्थन मिलता है या नहीं।
अनुमान हकीकत में बदल सकता है
यूएनडीपी ने नौ सितंबर को जारी अपनी अक रिपोर्ट में कहा है, अगर अफगान नागरिकों की मदद नहीं की गई और उनकी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिये तत्काल कदम नहीं उठाए गए तो अगले साल के मध्य में यह अनुमान हकीकत में बदल सकता है। लंबे समय तक सूखे और कोरोना महामारी के प्रभावों के अलावा, अफगानिस्तान मौजूदा समय में राजनीतिक बदलाव के कारण उथल-पुथल से जूझ रहा है। उसकी विदेशों में जमा पूंजी फ्रीज है और बैंकिंग प्रणाली ठप्प पड़ी हुई है।
संयुक्त राष्ट्र के सहायक महासचिव और एशिया और प्रशांत क्षेत्र के क्षेत्रीय ब्यूरो के यूएनडीपी निदेशक कन्नी विग्नाराजा ने कहा, "हम अफगानिस्तान में मानवीय और आर्थिक संकट को महसूस कर रहे हैं। देश की लगभग आधी आबादी को तुरंत मानवीय सहायता की जरूरत है। विंगराज ने कहा कि यह विश्लेषण बताता है कि हम अफगानिस्तान के सबसे कमजोर लोगों को तेजी से विनाशकारी गिरावट की ओर बढ़ता देख रहे हैं।" अफगानिस्तान में गरीबी दर 97-98 प्रतिशत तक पहुंचने की आशंका है। उन्होंने कहा कि फिलहाल गरीबी दर 72 प्रतिशत है।
पैकेज का प्रस्ताव
यूएनडीपी ने महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कमजोर लोगों और समुदायों की तत्काल मदद करने और स्थिति में सुधार करने के लिए एक पैकेज का प्रस्ताव किया है। पैकेज आवश्यक सेवाओं, स्थानीय आजीविका, बुनियादी आय और छोटे बुनियादी ढांचे पर केंद्रित है और इसका उद्देश्य 24 महीने के सामुदायिक विकास कार्यक्रम के माध्यम से करीब नौ मिलियन जरूरतमंद अफगान नागरिकों की मदद करना है।
इसके के तहत, सबसे कमजोर लोगों को कैश-फॉर-वर्क योजना का लाभ मिल सकता है। छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए अनुदान भी दिए जाने का प्रस्ताव है, जिसमें विशेष रूप से महिलाओं द्वारा संचालित व्यवसायों को लाभ पहुंचाने की कोशिश होगी। बच्चों, विकलांगों और बुजुर्ग नागरिकों को मासिक नकद हस्तांतरण के माध्यम से अस्थायी आय प्राप्त होगी।
इस बीच आज संयुक्त राष्ट्र ने भी चेतावनी दी है कि अफगानिस्तान को यदि तुरंत आर्थिक सहायता नहीं दी गई तो देश के "पूर्ण रूप से टूट" जाने का खतरा है। संयुक्त राष्ट्र ने सुरक्षा परिषद से विदेशों में जमा पूंजी को जारी करने का आग्रह किया है। अफगानिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत डेबोरा ल्यांस ने अफगानिस्तान को आर्थिक और सामाजिक पतन से बचाने के सुरक्षा परिषद से विदेशों में फ्रीज संपत्ति को जारी करने का आग्रह किया है।