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संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट: तय सीमा को पार कर सकता है धरती का तापमान

Tue, 10 Aug 2021 01:03 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, बर्लिन

सार

  • संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में इसे मानवता के लिए खतरे का निशान बताया
  • कोई भी क्षेत्र सुरक्षित नहीं, कहीं भागने की भी जगह नहीं, छिपने तक की गुंजाइश नहीं
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Global Warming - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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संयुक्त राष्ट्र की तरफ से सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि धरती का तापमान इतना गर्म होता जा रहा है कि एक दशक में यह संभवत: उस सीमा के पार पहुंच जाए जिसे दुनिया भर के नेता पेरिस समझौते के मुताबिक काबू करने की कोशिश कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने इसे मानवता के लिए कोड रेड (खतरे का लाल निशान) करार दिया है। 

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अमेरिका के वायुमंडलीय अनुसंधान के लिए राष्ट्रीय केंद्र की वरिष्ठ जलवायु वैज्ञानिक और इस रिपोर्ट की सह-लेखक लिंडा मर्न्स ने कहा, इस बात की गारंटी है कि चीजें और बिगड़ने जा रही हैं। मैं ऐसा कोई क्षेत्र नहीं देख पा रही जो सुरक्षित है, कहीं भागने की जगह नहीं है, कहीं छिपने की गुंजाइश नहीं है। जलवायु परिवर्तन पर अधिकार प्राप्त अंतर सरकारी समिति (आईपीसीसी) की रिपोर्ट जलवायु परिवर्तन को पूर्णत: मानव निर्मित करार देती है।

यह रिपोर्ट पिछली बार 2013 में जारी रिपोर्ट की तुलना में 21वीं सदी के लिए ज्यादा सटीक और गर्मी की भविष्यवाणी करती है। रिपोर्ट कहती है कि दुनिया किसी भी सूरत में 2030 के दशक में 1.5 डिग्री सेंटीग्रेड के आंकड़े को पुराने पूर्वानुमानों से भी काफी पहले पार कर लेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया पिछली डेढ़ सदी में पहले ही 1.1 डिग्री सेंटीग्रेड गर्म हो चुकी है।
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पेरिस समझौते में वैश्विक तापमान कम करने पर जोर
पेरिस जलवायु समझौते पर 2015 में करीब 200 देशों ने हस्ताक्षर किए थे और इसमें विश्व नेताओं ने सहमति जताई थी कि वैश्विक तापमान को दो डिग्री सेल्सियस (3.6 डिग्री फारेनहाइट) से कम रखना है। कार्बन उत्सर्जन में कितनी कटौती की जाएगी इस पर आधारित भविष्य के सभी पांच परिदृश्य इस समझौते में तय ऊपरी सीमा के पार जा रहे हैं। आंकड़े भी दर्शाते हैं कि हाल के वर्षों में तापमान बढ़ा है।

जलवायु परिवर्तन बेहद व्यापक और अभूतपूर्व है 
रिपोर्ट में कहा गया कि तीन परिदृश्यों में, दुनिया के दो डिग्री सेल्सियस (3.6 डिग्री फारेनहाइट) तापमान के औद्योगिक काल के पूर्व के समय से ऊपर जाने की आशंका है। इसका नतीजा बेहद व्यापक लू के थपेड़ों के साथ, सूखे और भारी बारिश की वजह से बाढ़ आदि के रूप में दिखाई दे रहा है। अमेरिका के राष्ट्रीय सामुद्रिक एवं वायुमंडलीय प्रशासन के वरिष्ठ जलवायु सलाहकार और आईपीसीसी के उपाध्यक्ष को बेर्रेट ने कहा, रिपोर्ट हमें बताती है कि जलवायु में हुए बदलाव व्यापक, त्वरित, गहन हैं और हजारों वर्षों में अभूतपूर्व हैं। हम जिन बदलावों का अनुभव कर रहे हैं , वे तापमान के साथ और बढ़ेंगे।

234 वैज्ञानिकों ने तैयार की है रिपोर्ट
यह रिपोर्ट 3,000 पन्नों से ज्यादा की है और इसे 234 वैज्ञानिकों ने तैयार किया है। इसमें कहा गया है कि तापमान से समुद्र स्तर बढ़ रहा है, बर्फ का दायरा सिकुड़ रहा है तथा प्रचंड लू, सूखा, बाढ़ और तूफान की घटनाएं बढ़ रही हैं। ऊष्णकटिबंधीय चक्रवात और मजबूत तथा बारिश वाले हो रहे हैं जबकि आर्कटिक समुद्र में गर्मियों में बर्फ पिघल रही है और इस क्षेत्र में हमेशा जमी रहने वाली बर्फ का दायरा घट रहा है।

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