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UNHRC: यूनिवर्सल पीरियोडिक रिव्यू में भारत ने चीन को घेरा; मानवाधिकारों और लैंगिक समानता पर दी सिफारिशें

Tue, 23 Jan 2024 06:10 PM IST
शिव शरण शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जिनेवा

सार

नवंबर 2018 में हुए तीसरे यूपीआर के दौरान चीन को मानवाधिकार परिषद के 150 सदस्य देशों ने 346 सिफारिशें दी थीं। इनमें से 284 को उसने स्वीकार भी किया था। हालांकि कई सिफारिशों को उसने 'स्वीकृत और पहले से ही लागू' के रूप में बताया था।
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चीन को घेरने की तैयारी। - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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चीन में बड़े पैमाने पर मानवाधिकारों के उल्लंघन के मुद्दे पर यूएन में भारत ने चीन को घेरा है। साथ  ही भारत ने चीन से मानवाधिकारों और लैंगिक समानता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दृढ़ता से बनाए रखने का आह्वान किया है।यूपीआर में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे राजनयिक गौरव कुमार ठाकुर ने विकासशील देशों की आकांक्षाओं को साकार करने में रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए भी कहा है। भारत ने यूपीआर के दौरान चीन को तीन सिफारिशें दीं। भारत के अलावा इन मुद्दों पर ब्रिटेन से लेकर अमेरिका समेत कई देशों मे इस मुद्दे पर चीन को घेरा।

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भारत द्वारा दी गई सिफारिश 

  • समावेशी और सतत विकास के माध्यम से अपने लोगों द्वारा बुनियादी मानवाधिकारों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाना जारी रखें।
  •  लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और सभी महिलाओं और लड़कियों के सशक्तिकरण के लिए उपाय करना जारी रखें।
  • बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार सहित विकासशील देशों की आकांक्षाओं को साकार करने में रचनात्मक भूमिका निभाना जारी रखें।

दरअसल, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में इन दिनों यूनिवर्सल पीरियोडिक रिव्यू (यूपीआर) वर्किंग ग्रुप का चौथा सत्र चल रहा है। यह सत्र 22 जनवरी से 2 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान चीन को वैश्विक निकाय में चीन के मानवाधिकार रिकॉर्ड को अंतरराष्ट्रीय जांच का सामना करना पड़ रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि यूनिवर्सल पीरियोडिक रिव्यू के वर्तमान सत्र में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सदस्य चीन को उसके मानवाधिकार दायित्वों के लिए जवाबदेह ठहरा सकते हैं। 

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के तहत समय-समय पर यूनिवर्सल पीरियोडिक रिव्यू (यूपीआर) किया जाता है। इसमें मानवाधिकार परिषद के सदस्य देश मानवाधिकार को लेकर एक-दूसरे की समीक्षा करते हैं। इसके अलावा, मानवाधिकार दायित्वों और प्रतिबद्धताओं की पूर्ति का भी आकलन किया जाता है। इसके अवाला, समीक्षक देश अपनी सिफारिशें भी देते हैं। इससे पहले इस समीक्षा सत्र का आयोजन आखिरी बार नवंबर 2018 में हुआ था। उस समय, संयुक्त राष्ट्र समिति द्वारा खुलासा किए जाने के कुछ महीनों बाद विभिन्न देशों ने उइगर मुसलमानों के खिलाफ अत्याचार के लिए चलाए जा रहे डिटेंशन कैंप को लेकर चीन की व्यापक आलोचना की थी।

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नवंबर 2018 में हुए तीसरे यूपीआर के दौरान चीन को मानवाधिकार परिषद के 150 सदस्य देशों ने 346 सिफारिशें दी थीं। इनमें से 284 को उसने स्वीकार भी किया था। हालांकि कई सिफारिशों को उसने 'स्वीकृत और पहले से ही लागू' के रूप में बताया था। हालांकि बीते सालों में उइगर और तिब्बतियों के अधिकारों, संयुक्त राष्ट्र के साथ सहयोग और देश के सभी क्षेत्रों में संयुक्त राष्ट्र की अप्रतिबंधित पहुंच, नेताओं और कारोबारियों को जबरन गायब करने और मनमाने ढंग से हिरासत में लेने की घटनाओं में वृद्धि हुई है। इससे पता चलता है कि भले ही चीन ने बीते सत्र में सिफारिशों को स्वीकार किया था, लेकिन उन्हें खारिज कर दिया गया। 

गौरतलब है कि बीते आठ सालों में चीन में हुए मानवाधिकारों के हनन के मुद्दे के वैश्विक स्तर पर कई जगह उठाया गया है। अब सितंबर 2022 में मानवाधिकार परिषद में शिनजियांग की स्थिति पर बहस के बाद इस सत्र में चीन के रिकॉर्ड पर खुलेआम चर्चा हो सकती है। तब से यह पहला यूपीआर सत्र भी है, जिसमें पाया गया कि उइगर और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ बीजिंग की कार्रवाई 'मानवता के खिलाफ अपराध' हो सकती है। साथ ही इस स्थिति को दबाने के लिए चीन कूटनीति स्तर पर लगातार मेहनत कर रहा है।

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