चीन में बड़े पैमाने पर मानवाधिकारों के उल्लंघन के मुद्दे पर यूएन में भारत ने चीन को घेरा है। साथ ही भारत ने चीन से मानवाधिकारों और लैंगिक समानता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दृढ़ता से बनाए रखने का आह्वान किया है।यूपीआर में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे राजनयिक गौरव कुमार ठाकुर ने विकासशील देशों की आकांक्षाओं को साकार करने में रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए भी कहा है। भारत ने यूपीआर के दौरान चीन को तीन सिफारिशें दीं। भारत के अलावा इन मुद्दों पर ब्रिटेन से लेकर अमेरिका समेत कई देशों मे इस मुद्दे पर चीन को घेरा।
दरअसल, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में इन दिनों यूनिवर्सल पीरियोडिक रिव्यू (यूपीआर) वर्किंग ग्रुप का चौथा सत्र चल रहा है। यह सत्र 22 जनवरी से 2 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान चीन को वैश्विक निकाय में चीन के मानवाधिकार रिकॉर्ड को अंतरराष्ट्रीय जांच का सामना करना पड़ रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि यूनिवर्सल पीरियोडिक रिव्यू के वर्तमान सत्र में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सदस्य चीन को उसके मानवाधिकार दायित्वों के लिए जवाबदेह ठहरा सकते हैं।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के तहत समय-समय पर यूनिवर्सल पीरियोडिक रिव्यू (यूपीआर) किया जाता है। इसमें मानवाधिकार परिषद के सदस्य देश मानवाधिकार को लेकर एक-दूसरे की समीक्षा करते हैं। इसके अलावा, मानवाधिकार दायित्वों और प्रतिबद्धताओं की पूर्ति का भी आकलन किया जाता है। इसके अवाला, समीक्षक देश अपनी सिफारिशें भी देते हैं। इससे पहले इस समीक्षा सत्र का आयोजन आखिरी बार नवंबर 2018 में हुआ था। उस समय, संयुक्त राष्ट्र समिति द्वारा खुलासा किए जाने के कुछ महीनों बाद विभिन्न देशों ने उइगर मुसलमानों के खिलाफ अत्याचार के लिए चलाए जा रहे डिटेंशन कैंप को लेकर चीन की व्यापक आलोचना की थी।