इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन
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रूस-यूक्रेन की बीच छिड़ी जंग में इंटरनेशलन स्पेस स्टेशन(ISS) का जिक्र बार-बार आ रहा है। यूक्रेन मुद्दे पर आमने-सामने आए रूस और अमेरिका अंतरिक्ष में स्थापित इस स्टेशन को लेकर भी एक दूसरे के खिलाफ हो गए हैं। यहां तक कि, रूस इसे धरती पर गिराने की धमकी दे चुका है। अब खबर है कि अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा अंतरिक्ष में स्थापित इस स्पेस स्टेशन में रूस के सहयोग को खत्म करने की तैयारी कर रही है। आखिर, क्या है यह स्पेस स्टेशन और क्यों हो रहा है बार-बार इसका जिक्र?
24 साल पहले अंतरिक्ष में उतारा गया था आईएसएस
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन को अंतरिक्ष में भेजे करीब 24 साल पूरे हो गए हैं। रूस, अमेरिका, जापान, कनाडा और यूरोप की मदद से यह मिशन 1998 में शुरू किया गया था। धीरे-धीरे यह स्पेस स्टेशन आकार लेता गया और तब से लेकर आज तक करीब 20 से ज्यादा देशों के 200 से ज्यादा अंतरिक्ष यात्री इस स्पेस स्टेशन की यात्रा कर चुके हैं। इस स्पेस स्टेशन में पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से बाहर करीब 3000 से ज्यादा शोध हो चुके हैं।
क्या करता है अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन?
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन, एक बड़ा अंतरिक्ष यान है जो विस्तारित अवधि के लिए पृथ्वी की निचली कक्षा में रहता है। एक तरीके से यह स्टेशन अंतरिक्ष में मानवी जीवन के लिए अनुकूल घर और प्रयोगशाला की तरह है। यहां पर जीवन जीने के लिए हर वह वस्तु उपलब्ध है, जिसकी जरूरत पड़ सकती है। यह अंतरिक्ष में एक बड़ी प्रयोगशाला की तरह है। इसमें अंतरिक्ष यात्री हफ्तों या महीनों तक रहते हैं और माइक्रोग्रैविटी में रहकर विभिन्न प्रकार के प्रयोग करते हैं। आईएसएस, पांच अंतरिक्ष एजेंसी, नासा (संयुक्त राज्य अमेरिका), रोस्कोसमोस (रूस), जेएएक्सए (जापान), ईएसए (यूरोप) और सीएसए (कनाडा) के बीच अनुकरणीय सहयोग के लिए भी जाना जाता है।
धरती से 400 किमी ऊपर है 500 टन वजनी ढांचा
अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन को पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किया गया है। यह धरती से करीब 400 किलोमीटर ऊपर स्थापित है। अंतरिक्ष स्टेशन का वजन करीब 500 टन है। यह एक फुटबॉल मैदान के जितना बड़ा अंतरिक्ष स्टेशन है। कई देशों के सहयोग से संचालित हो रहे इस स्टेशन की लागत करीब 15 हजार करोड़ यूएस डॉलर आंकी गई है।
आईएसएस को सफल बनाने में रूस का है अहम योगदान
रिपोर्ट के अनुसार, आईएसएस को सफल बनाने में रूस का बड़ा योगदान रहा है। 2011 में अमेरिका द्वारा अपने अंतरिक्ष शटल प्रोग्राम को सेवानिवृत्त करने के बाद से ही सोयुज यात्री वाहन अंतरिक्ष यात्रियों को आईएसएस तक ले जाने का काम कर रहा था। हालांकि, पिछले साल अंतरिक्ष यात्रियों को आईएसएस तक ले जाने के लिए एलन मस्क द्वारा विकसित स्पेसएक्स प्रणाली का उपयोग किया जाने लगा। जिसकी वजह से रोस्कोसमोस को बड़ा झटका लगा। क्योंकि रूस अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष स्टेशन तक ले जाने के लिए नासा से माेटी रकम लेता था। रिपोर्ट के अनुसार 2011 से 2019 के बीच नासा ने सोयूज उड़ानों पर 3.9 बिलियन डॉलर खर्च किए थे। अगले साल, यूएस के पास स्पेसएक्स के अलावा एक और घरेलू विकल्प होने की उम्मीद है।
खुद का स्पेस स्टेशन बनाने की तैयारी कर रहा रूस
रूस अब अपने स्वयं के अंतरिक्ष स्टेशन का निर्माण और प्रबंधन करने की योजना बना रहा है, जिसे वह 2030 तक कक्षा में लॉन्च करना चाहता है। इंटरफैक्स की रिपोर्ट के अनुसार, रूस के अंतरिक्ष मॉड्यूल को एनर्जिया कॉर्पोरेशन द्वारा असेंबल किया जा रहा है, और इसकी न्यूनतम लागत 5 बिलियन डॉलर है। स्टेशन कथित तौर पर पृथ्वी की एक उच्च ऑर्बिट पर परिक्रमा करेगा, जिससे ध्रुवीय क्षेत्रों (पोलर रीजन) का बेहतर निरीक्षण किया जा सकेगा, खासकर तब जब रूस आर्कटिक समुद्री मार्ग तैयार करने की योजना बना रहा है। खास बात यह है कि, रूस 2025 तक खुद आईएसएस से अलग होने की घोषणा कर चुका है।
आसान नहीं होगा अकेले ISS का परिचालन
नासा ने रूसी मदद के बिना अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के परिचालन के तरीके तलाशने शुरू कर दिए हैं। हालांकि, यह इतना आसान नहीं होगा। दरअसल, आईएसएस मिशन में अमेरिकी पक्ष ऊर्जा और मानवीय जीवन समर्थन की आपूर्ति करना है। वहीं रूस का काम स्टेशन के परिचालन और तकनीकी मदद मुहैया कराना है। ऐसे में नासा को नए सिरे से इसके परिचालन का तरीका तलाशना होगा। नासा की वैज्ञानिक व कार्यक्रम प्रमुख कैथी लाइडर्स का कहना है कि, हमारे लिए अपने दम पर आईएसएस का संचालन करना बहुत मुश्किल होगा। आईएसएस एक अंतरराष्ट्रीय साझेदारी है जिसे बनाए रखना होगा।
रूस की ओर से दी गई थी चेतावनी
वर्तमान में आईएसएस पर अमेरिका, रूस और जर्मनी जैसे कई देश मिलकर काम कर रहे हैं। इसके तहत चार अमेरिकी, दो रूसी और एक जर्मन अंतरिक्ष यात्री माइक्रोग्रैविटी में साथ-साथ काम कर रहे हैं। यूक्रेन पर हमले के बाद अमेरिका की ओर से प्रतिबंधों की घोषणा की गई थी। इसके बाद रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस के प्रमुख दमित्री रोगोजिन का बयान सामने आया था। उन्होंने लिखा था कि, यदि आप हमारे साथ सहयोग रोकते हैं तो आईएसएस अनियंत्रित होकर कहीं भी गिर सकता है। विशेष तौर पर यह यूरोप या अमेरिका में गिर सकता है। दमित्री ने कहा था कि, हमारे पास इस 500 टन के ढांचे को भारत और चीन में गिराने का भी विकल्प खुला हुआ है। क्या आप उन्हें ऐसी संभावना से धमकाना चाहते हैं? आईएसएस रूस के ऊपर से नहीं उड़ता है। ऐसे में प्रतिबंध लगाने से पहले आप जान लें कि आपको क्या करना है?