ब्रिटेन की विपक्षी लेबर पार्टी ब्रिटिश भारतीयों तक पहुंचने के अपनी कोशिशों में बदलाव कर रही है। पार्टी को यह कदम इसलिए उठाना पड़ा क्योंकि देश के सबसे बड़े जातीय अल्पसंख्यक समुदाय के बीच पार्टी का समर्थन हाल के वर्षों में कम हुआ है।
पार्टी के एक प्रवक्ता ने कहा, "कीर स्टारर की बदली हुई लेबर पार्टी कामकाजी लोगों की सेवा में वापस आ गई है और हम भारतीय समुदायों सहित सभी पृष्ठभूमियों और धर्मों के लोगों के साथ जुड़ना जारी रखेंगे। पार्टी समर्थकों की ओर से किए जा रहे उपायों में लेबर इंडियंस नामक एक नया समूह स्थापित करना शामिल है जो सामुदायिक कार्यक्रमों को आयोजित करेगा और सोशल मीडिया पर ब्रिटिश भारतीयों को संदेश देगा।
समूह के अध्यक्ष कृष रावल ने कहा, "यह इवेंट संगठन और सोशल मीडिया प्रसार पर केंद्रित एक पहल के रूप में शुरू किया है। हम लेबर पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए हितधारकों के व्यापक समूह की सेवा करना चाहते हैं।"
समूह के साथ काम करने के लिए दो स्वयंसेवकों को काम पर रखा गया है, उनका काम भारत से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लेबर पार्टी के संसदीय उम्मीदवारों को ब्रीफ करने पर केंद्रित है। रविवार को शैडो विदेश सचिव, डेविड लैमी और शैडो व्यापार सचिव, जोनाथन रेनॉल्ड्स, पांच दिवसीय यात्रा पर दिल्ली और मुंबई की यात्रा करेंगे। वे अपनी यात्रा के दौरान यह प्रदर्शित करेंगे कि पार्टी भारतीय हितों के प्रति शत्रुतापूर्ण नहीं है। ब्रिटेन में भारतीय दूसरा सबसे बड़ा आप्रवासी समूह है।
वर्षों तक लगभग दो-तिहाई ब्रिटिश भारतीयों ने अन्य अल्पसंख्यक-जातीय समूहों के अनुरूप लेबर पार्टी का समर्थन किया। लेकिन हाल के वर्षों में इसमें तेजी से गिरावट आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव आंशिक रूप से सामाजिक आर्थिक कारणों से और आंशिक रूप से धार्मिक कारणों से आया है। जानकारों के अनुसार ब्रिटिश भारतीय हाल के वर्षों में अमीर हो गए हैं, सर्वेक्षण के आंकड़ों से पता चलता है कि उनके दृष्टिकोण अधिक रूढ़िवादी हो गए हैं।
यूके इन ए चेंजिंग यूरोप सर्वेक्षण से पता चलता है कि 2019 के चुनाव में मतदान करने वाले अधिकांश हिंदुओं ने टोरी (कंजर्वेटिव) का समर्थन किया था। जेरेमी कॉर्बिन के लेबर पार्टी के नेतृत्व काल में भारतीय मूल के अप्रवासियों का टोरी पार्टी के प्रति समर्थन बढ़ गया था, क्योंकि उन्होंने कश्मीर पर भारतीय के विरोध का समर्थन किया था।