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UK: 'ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा भारतीय प्रवासियों की कर्जदार' यूके के मंत्री का बड़ा बयान

Thu, 24 Oct 2024 09:54 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लंदन

सार

कैबिनेट मंत्री ने भारत की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा और अनुसंधान और नवाचार जैसे क्षेत्रों की तारीफ की और कहा कि उनसे ब्रिटेन सीख सकता है। 
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NHS - फोटो : www.england.nhs.uk
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विस्तार
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ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने ब्रिटेन की स्वास्थ्य सेवाओं में भारतीय मूल के लोगों के योगदान की जमकर सराहना की है। उन्होंने कहा है कि ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) भारतीय प्रवासियों की कर्जदार है। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत के साथ साझेदारी ही ब्रिटेन को भविष्य के लिए देश की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को आधुनिक बनाने की चुनौतियों का सामना करने में मदद करेगी। बुधवार शाम को लंदन में इंडिया ग्लोबल फोरम (आईजीएफ) के वार्षिक दिवाली समारोह में शामिल हुए स्ट्रीटिंग ने ये बातें कही। 
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क्या बोले यूके के स्वास्थ्य मंत्री
ब्रिटिश स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने कहा, 'पिछले 76 वर्षों में एनएचएस को जिस तरह से आकार दिया गया है, जब मैं उसके बारे में सोचता हूं, तो हम ब्रिटेन में भारतीय प्रवासियों के प्रति बहुत ऋणी हैं। एक पीढ़ी ने साल 1948 में एनएचएस को बनाने में मदद की थी और आज हम देखते हैं कि उनके बच्चे, पोते और परपोते इसके भविष्य को आकार दे रहे हैं। जब हम अपनी स्वास्थ्य सेवा में चुनौतियों को देखते हैं, साथ ही एक बहुत ही नाजुक और अस्थिर दुनिया को देखते हैं, तो चुनौती से परेशान होना बहुत आसान है, लेकिन दिवाली उस अंधकार पर प्रकाश की जीत का जश्न मनाने का एक शानदार समय है।' 

वैक्सीन साझेदारी का किया जिक्र
कैबिनेट मंत्री ने भारत की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा और अनुसंधान और नवाचार जैसे क्षेत्रों की तारीफ की और कहा कि उनसे ब्रिटेन सीख सकता है। उन्होंने कोरोना महामारी के समय भारत-ब्रिटेन की वैक्सीन साझेदारी का भी जिक्र किया और कहा कि यह इस बात का उदाहरण है कि कैसे द्विपक्षीय साझेदारी को स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ाया जा सकता है। स्ट्रीटिंग ने कहा, 'ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा मिलकर विकसित किए गए टीके आज दुनिया के कुछ सबसे गरीब हिस्सों में लोगों की जान बचा रहे हैं।
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उल्लेखनीय है कि ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) में भारतीय या भारतीय मूल के डॉक्टर्स को रीढ माना जाता है और ये ही एनएचएस में केंद्रीय भूमिका में हैं। ब्रिटिश एसोसिएशन ऑफ फिजीशियन ऑफ इंडियन ऑरिजन नामक संगठन के अनुसार, एनएचएस में करीब 40 हजार भारतीय मूल के डॉक्टर काम कर रहे हैं।
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