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गंभीर हुए हालात: ब्रिटेन में पहली बार कोरोना के दैनिक मामले एक लाख के पार, लेकिन नए प्रतिबंध लगाने से बच रही सरकार

Wed, 22 Dec 2021 11:04 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन

सार

मंगलवार को ब्रिटेन में पहली बार कोरोना वायरस के दैनिक मामलों का आंकड़ा एक लाख को पार कर गया। यहां हाल के दिनों में अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों और इस बीमारी से जान गंवाने वाले संक्रमितों की संख्या भी बढ़ी है। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पिक्साबे
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विस्तार
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कोरोना वायरस के नए और अधिक संक्रामक ओमिक्रॉन वैरिएंट के सामने आने के साथ एक समय में इस महामारी से बहुत अधिक प्रभावित रहे ब्रिटेन में हालात एक बार फिर बिगड़ने लगे हैं। यहां पहली बार कोरोना के दैनिक मामलों की संख्या एक लाख के पार पहुंच गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार मंगलवार को कोरोना वायरस संक्रमण के ब्रिटेन में एक लाख छह हजार 122 नए मामले सामने दर्ज किए गए। इससे पहले एक दिन में सबसे ज्यादा मामले 17 दिसंबर 2020 को मिले थे, तब यह आंकड़ा 93,045 था। 

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सरकारी आंकड़ों के अनुसार मंगलवार को कोविड संक्रमित 8008 मरीज अस्पतालों में भर्ती थे। यह 22 नवंबर के बाद  सबसे ऊंचा आंकड़ा है। अस्पताल में भर्ती होने वाले कोरोना मरीजों की संख्या में पिछले एक सप्ताह में चार फीसदी की तेजी आई है। पिछले 28 दिनों में यहां कोरोना वायरस से संक्रमित 140 मरीजों की मौत हो चुकी है। हालांकि, प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन कह चुके हैं कि क्रिसमस से पहले देश में कोई नया प्रतिबंध लागू नहीं किया जाएगा। लेकिन, तेजी से बढ़ते मामले चिंता का विषय बन चुके हैं।

सक्रिय मामलों की संख्या 15 लाख से ज्यादा, मृत्यु दर में भी तेजी
यहां इस समय कोरोना वायरस के सक्रिय मरीजों की संख्या 15 लाख 77 हजार 420 है। उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह की तुलना में पिछले सात दिनों में कोरोना के दैनिक मामलों में यहां 58.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, इसी अवधि में दैनिक मौतों के मामलो में भी 2.7 फीसदी की तेजी आई है। फिलहाल राहत की बात यह है कि मामलों में तेजी आने के साथ ब्रिटेन में टीकाकरण की रफ्तार भी तेज है। मंगलवार को यहां रिकॉर्ड संख्या में नौ लाख 68 हजार 665 टीके की बूस्टर या तीसरी खुराकें लगाई गईं।
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डब्ल्यूएचओ महानिदेशक ने असमान टीका वितरण पर जताई चिंता
उधर, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस घेब्रेसियस ने कहा है कि कोई भी देश कोविड-19 वैश्विक महामारी से तेजी से बचकर नहीं निकल सरकता है। और बूस्टर खुराकों को योजनाबद्ध समारोहों के साथ आगे बढ़ने के लिए एक टिकट के तौर पर नहीं देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस साल पूरे देश में इतनी संख्या में टीके लगाए गए हैं कि अगर इनका वितरण समानता के साथ किया जाता तो इस साल सितंबर तक हर देश में 40 फीसदी पात्र आबादी का टीकाकरण किया जा सकता था। 
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