नाटो में एक और देश की एंट्री हो गई है। बता दें कि तुर्किए की संसद ने गुरुवार को फिनलैंड को नाटो का सदस्य बनने की मंजूरी दे दी। तुर्किए की संसद ने एकमत से यह फैसला किया। इसके साथ ही फिनलैंड का नाटो सदस्य बनना तय हो गया है। नाटो के अन्य देश पहले ही फिनलैंड को नाटो का सदस्य बनाने की मंजूरी दे चुके हैं। हालांकि अभी स्वीडन के नाम को तुर्किए की संसद की मंजूरी नहीं मिल पाई।
इस मुद्दे पर नहीं मिल रही थी मंजूरी
बता दें कि स्वीडन और फिनलैंड ने साल 2022 में नाटो का सदस्य बनने के लिए आवेदन किया था। इसके बाद अधिकतर देशों ने स्वीडन और फिनलैंड को नाटो का सदस्य बनाने की मंजूरी दे दी थी लेकिन हंगरी और तुर्किए इसके लिए तैयार नहीं थे। तुर्किए का आरोप था कि कुर्दिश आतंकी संगठन फिनलैंड और स्वीडन में अपना बेस बनाए हुए हैं और वहां से तुर्किए के खिलाफ साजिश रच रहे हैं। हालांकि दोनों देशों ने तुर्किए के आरोपों से इनकार किया था।
वहीं हंगरी का आरोप है कि स्वीडन और फिनलैंड में कानून व्यवस्था की स्थिति ठीक नहीं है और दोनों देश इसके बारे में झूठ बोलते हैं। हालांकि बाद में तुर्किए और हंगरी ने फिनलैंड के प्रति अपने रुख को नरम कर लिया था और फिनलैंड को नाटो में शामिल करने की मंजूरी दे दी। हालांकि दोनों देश अभी भी स्वीडन की सदस्यता का विरोध कर रहे हैं। हंगरी का कहना है कि स्वीडन को सदस्यता पाने के लिए कई बड़े कदम उठाने होंगे।
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फिनलैंड ने जताई खुशी
वहीं नाटो की सदस्यता मिलने पर फिनलैंड ने खुशी जाहिर की है। फिनलैंड के राष्ट्रपति साउली निनिस्तो ने कहा कि हमारा देश नाटो में शामिल होने के लिए तैयार है। सभी 30 देशों ने उनकी सदस्यता को मंजूरी दे दी है और वह सभी सदस्य देशों को उनका समर्थन करने के लिए धन्यवाद देना चाहते हैं। निनिस्तो ने कहा कि फिनलैंड एक मजबूत और सक्षम सहयोगी बनेगा। उन्होंने ये भी कहा कि हम उम्मीद कर रहे हैं स्वीडन भी जल्द नाटो का सदस्य बनेगा। नाटो के महासचिव जेंस स्टोलटेनबर्ग ने भी फिनलैंड को नाटो का सदस्य बनाए जाने का स्वागत किया और कहा कि इससे नाटो और मजबूत होगा।
क्या है नाटो (NATO)
नाटो यानी कि नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन, एक रक्षा गठबंधन है। साल 1949 में इसका गठन किया गया था। इस संगठन में अमेरिका, यूके, कनाडा और फ्रांस जैसे देश शामिल हैं। इस संगठन के देशों पर अगर कोई हमला करता है तो सभी सदस्य देश एक दूसरे की मदद करेंगे और विरोधी देश पर एक साथ हमला करेंगे। रूस से यूरोप को बचाने के लिए नाटो की शुरुआत हुई थी और आज नाटो के कुल 30 सदस्य देश हैं। जो अब बढ़कर 31 हो जाएंगे।