ट्रंप ने पहले भी कई बार इस्राइल और फलस्तीन के बीच शांति समझौते के लिए प्रस्ताव पेश करने की बात कही लेकिन उनकी योजना पिछले दो सालों से टल रही है। फलस्तीन के लोगों का मानना है कि ट्रंप की योजना इस्राइल के पक्ष में ही होगी, इसलिए उनके लिए यह बेकार है। बता दें कि अमेरिका वेस्ट बैंक इलाके में इस्राइली कब्जे और येरुशलम को राजधानी मान चुका है, जिसका फलस्तीन हमेशा विरोध करता रहा है।
यह है दोनों देशों के बीच विवाद की जड़
1993 में हुए एक शांति समझौते के मुताबिक, येरुशलम की स्थिति को लेकर दोनों देशों के बीच शांति वार्ता होनी हैं। फलस्तीन का कहना है कि इस्राइल ने उसकी जमीन पर जबरन कब्जा कर रखा है। 1967 के बाद से ही इस्राइल ने यहां कई निर्माण कर लिए हैं। अभी पूर्वी येरुशलम में करीब 2 लाख यहूदियों के घर हैं। अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक यह गलत है, जिसे इस्राइल नहीं मानता।