सोनिक किरणों के प्रभाव से उभरते हैं हवाना सिंड्रोम के लक्षण
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक जब जेसॉन रिपोर्ट आई थी, तब उसके निष्कर्षों की जानकारी अमेरिका के नेशनल एकेडमिक्स ऑफ साइंसेज की एक खास समिति को उस समय नहीं दी गई, जब उसने इस मामले की जांच शुरू की थी। उस समिति ने पिछले साल हवाना सिंड्रोम पर शोध किया था। उस शोध का निष्कर्ष था कि माइक्रोवेव का असर इस समस्या के लक्षणों का सबसे अधिक संभावित कारण है। इन लक्षणों में सिरदर्द, चक्कर आना, कान में शोर सुनाई देना, सुनने या देखने में बाधा, नाक से खून आना, वर्टिगो और यादाश्त कमजोर पड़ जाना शामिल हैं।
लेकिन अब जेसॉन रिपोर्ट में कहा गया है कि रेडियो या माइक्रोवेव या सोनिक किरणों के प्रभाव से हवाना सिंड्रोम के लक्षण उभरते हैं, इस बात का कोई साक्ष्य नहीं है। बल्कि कान में शोर सुनाई देने वाले जैसे लक्षण झींगुर के कारण महसूस हो सकते हैं। 2019 में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के अनुसंधानकर्ता भी इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि झींगुर जैसा कोई जीव रहस्यमय शोर का कारण हो सकता है।
अब ये सवाल उठा है कि ये रिपोर्ट 2018 में आखिर क्यों छिपाई गई। क्या इसकी वजह यह थी कि उससे अमेरिका सरकार के दावे खंडित होते हैं? अमेरिका के पूर्व ट्रंप प्रशासन ने यही दलील देकर क्यूबा से संबंध का दर्जा गिरा दिया था कि हवाना सिंड्रोम क्यूबा से होने वाले हमलों की वजह से होता है। बाद में चीन और रूस से भी ऐसे हमले किए जाने के आरोप लगाए गए।
पिछले हफ्ते अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव ने सर्व-सम्मति से हेल्पिंग अमेरिकन विक्टिम्स एफलिक्टेड बाइ न्यूरोलॉजिकल अटैक्स (हवाना) अधिनियम पारित किया। उससे जरिए सीआईए को लाखों डॉलर देने का रास्ता खुल गया है, जिससे वह कथित हवाना सिंड्रोम के पीड़ितों को मुआवजा देगी।
पिछले महीने क्यूबा का वैज्ञानिकों ने अपनी एक अध्ययन रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें कहा गया था कि सोनिक किरणों से हमले की बात वैज्ञानिक रूप से स्वीकार्य नहीं है। ऐसे हमले होने का कोई वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं हैं। अब सामने आया है कि उनके पहले ही एक अमेरिकी अध्ययन भी इसी निष्कर्ष पर था। लेकिन संभवतया राजनीतिक और कूटनीतिक कारणों से उसे छिपा कर रखा गया था।