शी ने समावेशी विकास को अपने भाषण का केंद्रीय पहलू बनाया। उन्होंने एक ‘वैश्विक विकास पहल’ शुरू करने का एलान किया, हालांकि उन्होंने इसका विवरण पेश नहीं किया। उन्होंने कहा- ‘जरूरत इस बात की है कि हम शांति, विकास, न्याय, समता, लोकतंत्र और स्वतंत्रता की वकालत करें, जो पूरी मानवता के साझा उसूल हैं। साथ ही जरूरत यह है कि टकराव बढ़ाने वाले छोटे गुट बनाने की कोशिशों को अस्वीकार किया जाए।’ साफ तौर पर ये तमाम बातें अमेरिका को निशाने पर रखते हुए कही गईं।
अमेरिका और चीन के बीच बढ़ रहा तनाव इस समय सारी दुनिया की चिंता का कारण बना हुआ है। बीते हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने चेतावनी दी थी कि बढ़ रहे टकराव से नए शीत युद्ध का खतरा है। गुतारेस ने अमेरिका और चीन से बातचीत, सहयोग, समानता और पारस्परिक सम्मान की भावना से अपने मतभेद दूर करने की अपील की थी। लेकिन पर्यवेक्षकों का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के भाषण से ऐसा नहीं लगता कि उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव की अपील पर ध्यान दिया है।
बाइडन ने अपने भाषण में कहा कि अमेरिका नया शीत युद्ध नहीं चाहता है। वह नहीं चाहता कि दुनिया दो खेमों में बंटे। उधर शी ने भी शांति और विकास पर जोर दिया। लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि दोनों देशों के बीच जिन मुद्दों को लेकर टकराव है, उन पर किसी देश का रुख नरम होने के संकेत नहीं मिले।