नेपाल में सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश चोलेंद्र शमशेर राणा पर महाभियोग लगाने की प्रक्रिया आखिरकार शुरू हो गई है। आरोप था कि प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा उन्हें बचाने की कोशिश में हैं। लेकिन अब देउबा के नेतृत्व वाली नेपाली कांग्रेस भी राणा को हटाने की प्रक्रिया में शामिल हो गई है। रविवार को नेपाली संसद की समिति बनाई, जो महाभियोग लगाने के बारे में अपनी सिफारिश देगी। तकरीबन तीन हफ्ते पहले संसद में राणा के खिलाफ संसद में महाभियोग प्रस्ताव दर्ज किया गया था।
अब 11 सदस्यों की एक महाभियोग अनुशंसा समिति बनाई गई है। समिति बनाने के प्रस्ताव को सदन ने बहुमत से पारित कर दिया। राणा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव 98 सांसदों ने बीते 13 फरवरी को रजिस्टर्ड कराया था। ये सभी सांसद सत्ताधारी गठबंधन में शामिल पार्टियों- नेपाली कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर), और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट) के हैं। इस बीच महाभियोग प्रस्ताव को लेकर सत्ताधारी गठबंधन ने अचानक जो तेजी दिखाई है, उसे लेकर राजनीतिक हलकों में सवाल उठाए जा रहे हैं।
सत्ताधारी गठबंधन का कहना है कि अब तक वह अमेरिकी संस्था मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन (एमसीसी) की आर्थिक मदद से जुड़े अनुमोदन प्रस्ताव को संसद से पारित कराने में व्यस्त था। इसलिए महाभियोग प्रस्ताव की प्रक्रिया ठंडे बस्ते में पड़ी हुई थी। अनुमोदन प्रस्ताव पास होने के बाद अब इसे तरजीह दी जा रही है। रविवार को जब संसद में महाभियोग के लिए अनुशंसा समिति बनाने का प्रस्ताव लाया गया, तो यूएमएल ने पहले उसका विरोध किया। लेकिन बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक के बाद वह उस प्रक्रिया में शामिल होने को तैयार हो गई। अब अनुशंसा समिति में उसके चार सांसदों को शामिल किया गया है।
राणा को जनवरी 2019 में चीफ जस्टिस बनाया गया था। अभी उनके कार्यकाल के नौ महीने बाकी हैं। उन पर भ्रष्टाचार और प्रधानमंत्री देउबा से मिलीभगत कर अपने लोगों को सियासी पदों पर नियुक्त करवाने का आरोप है। पिछले कई महीनों से इन आरोपों के कारण सुप्रीम कोर्ट के वकील उनका बहिष्कार कर रहे हैं। बाकी जजों ने भी उनके साथ काम करने से इनकार कर रखा है। इस कारण वे चीफ जस्टिस के रूप में काम नहीं कर पा रहे हैं।