अब तक हुई 14 दौर की बातचीत के बाद चलते पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग त्सो, गलवान और गोगरा हॉट स्प्रिंग क्षेत्रों के उत्तर और दक्षिण तटों से सेना वापस बुलाने व तनाव खत्म करने का समाधान हुआ। दोनों पक्ष अब लद्दाख के अन्य इलाकों में तनाव खत्म करने का प्रयास करेंगे।
पूर्वी लद्दाख में बाकी बचे विवादित क्षेत्रों के समाधान के लिए भारत और चीन के कोर कमांडरों की 11 मार्च को 15वीं बैठक होगी। रक्षा क्षेत्र से जुड़े सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि अब तक की वार्ता से पैंगोंग सो के उत्तरी व दक्षिणी तटों, गलवां और गोगरा हॉट स्प्रिंग इलाके का समाधान हुआ है।
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इससे पहले इस साल 12 जनवरी को हुई 14वें दौर की वार्ता में हालांकि कोई खास कामयाबी नहीं मिली थी, लेकिन शुक्रवार को होने वाली बातचीत से दोनों पक्षों को काफी उम्मीदें हैं। भारत पूर्वी लद्दाख के शेष विवादित क्षेत्रों पेट्रोलिंग पॉइंट 15 (हॉट स्प्रिंग), डेपसांग और डेमचक से सेना को हटाने के लिए चीन से लगातार बात करता रहा है।
15वीं वार्ता से दोनों पक्षों को काफी उम्मीदें
सूत्रों का कहना है कि 11 मार्च को होने वाली शीर्ष सैन्य अधिकारियों की बैठक भारतीय क्षेत्र चुशुल मोल्दो में होगी, जिसमें पिछले 22 माह से दोनों पक्षों के बीच जारी गतिरोध समाप्त होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि परस्पर स्वीकार्य समाधान को लेकर हाल में दिए गए दोनों पक्षों के बयान काफी उत्साहजनक और सकारात्मक रहे हैं।
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उल्लेखनीय है कि पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद 5 मई, 2020 को शुरू हुआ था, जिसके कारण पेंगोंग झील इलाके में दोनों पक्षों में खूनी संघर्ष हुआ था। उसके बाद दोनों पक्षों ने सीमा पर घातक हथियार और सैन्य तैनाती बढ़ा दी थी। वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास दोनों ओर करीब पचास से 60 हजार सैनिकों का जमावड़ा है।
भारत-चीन को साझेदार होना चाहिए प्रतिद्वंद्वी नहीं : वांग
चीनी विदेशमंत्री वांग यी ने सोमवार को कहा था कि भारत-चीन के रिश्तों में हाल के वर्षों में लगे कुछ झटके दोनों पक्षों के हक में नहीं हैं। उन्होंने कहा था कि विवादित सीमा विवाद पर मतभेदों का बड़े परिप्रेक्ष्य पर असर नहीं पड़ना चाहिए। वांग ने उम्मीद जताई कि भारत और चीन को परस्पर सफलता का साझेदार होना चाहिए न कि प्रतिद्वंद्वी।