काबुल के एयरपोर्ट तक जाने वाली एक मुख्य सड़क पर भी तालिबान का चेक प्वॉइंट है।
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अफगानिस्तान में तालिबान का राज आने के साथ ही उथल-पुथल मची है। लगातार हजारों की संख्या में लोग काबुल के हामिद करजई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर जुटे हैं। इस बीच गुरुवार को हवाईअड्डे के ठीक बाहर बड़े धमाके हुए। इनमें अब तक करीब 170 लोगों की मौत, जबकि 250 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है। इस बीच हर तरफ यह सवाल उठ रहा है कि इस्लामिक स्टेट-खोरासान (आईएस-के) के आतंकी आखिर कैसे अधिकतम सुरक्षा वाले एयरपोर्ट इलाके में घुसने में सफल रहे। वह भी तब जब तालिबान ने कुछ दिन पहले ही काबुल की सुरक्षा की जिम्मेदारी अपने साथी आतंकी संगठन हक्कानी नेटवर्क को सौंपी थी और वह खुद एयरपोर्ट के बाहर चेक प्वॉइंट बनाकर अंदर जाने वाले लोगों की जांच कर रहा था।
क्या है काबुल एयरपोर्ट की लोकेशन?
काबुल का हामिद करजई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा दो हिस्सों में बंटा है। एक हिस्सा फिलहाल सेना के नियंत्रण में है, जबकि दूसरे हिस्से पर आम लोग जमे हैं। एयरपोर्ट के जिस बाहरी हिस्से पर अमेरिकी और नाटो सेनाओं का कब्जा है, उनमें तीन गेट्स हैं। ये गेट हैं- नॉर्थ गेट, ईस्ट गेट और ऐबी गेट। पहला धमाका इन्हीं तीन गेटों में से एक ऐबी गेट पर हुआ। अगला धमाका इस गेट के पास बैरन होटल के गेट पर हुआ। बताया जाता है कि भारतीय राजदूत, राजनयिक और दूतावास का स्टाफ 17 अगस्त को अफगानिस्तान से निकलने के लिए इसी ऐबी गेट से होकर गुजरा था।
हालांकि, इसके बावजूद आईएस आतंकियों का तालिबान की कड़ी जांच से निकल जाना अपने आप में सवाल पैदा करता है। वह भी तब जब अमेरिका ने खुद आईएस आतंकियों के हमले का अलर्ट तालिबान को मुहैया कराया था और अपनी सेनाओं के लिए भी अलर्ट जारी किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने हमले की सूचना से जुड़ी पूरी जानकारी तालिबान को दे दी थी।
क्यों उठ रहे एयरपोर्ट धमाके को लेकर सवाल?
दरअसल, तालिबान ने हाल ही में काबुल पर कब्जा करने के बाद इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी अपने साथी आतंकी संगठन हक्कानी नेटवर्क को सौंप दी थी। इस गुट की जिम्मेदारी काबुल में लोगों की निगरानी करना और घर-घर जाकर लोगों की जांच करना था। इतना ही नहीं हक्कानी नेटवर्क के आतंकी अफगान नागरिकों से पूछताछ कर उन्हें काबुल के एयरपोर्ट तक जाने से भी रोक रहे थे।
उधर एयरपोर्ट की लोकेशन और उसके आसपास के नक्शे को देखकर यह साफ है कि हवाई अड्डे तक जाने के लिए सिर्फ एक ही मुख्य सड़क थी जिसके मोड़ पर तालिबान ने एक चेक प्वॉइंट बनाया था। तालिबान का मकसद इस दौरान एयरपोर्ट को सुरक्षा मुहैया कराना और अपने नागरिकों को निकालने में जुटे अमेरिका और नाटो देशों को उड़ानों के संचालन में कोई दिक्कत न आने देने का था। इतना ही नहीं इस चेक प्वॉइंट का मकसद सिर्फ विदेशी नागरिकों को आगे जाने देना और अफगानिस्तान छोड़कर भाग रहे नागरिकों को रोकना भी था। तालिबान ने हाल ही में खुद ऐलान किया था कि वह अब अफगान लोगों को एयरपोर्ट के करीब नहीं जाने देगा। इसलिए उसने सड़क पर ही अपने आतंकियों को बिठाकर लोगों की जांच का आदेश दिया था।
हालांकि, इसके बावजूद आईएस आतंकियों का तालिबान की कड़ी जांच से निकल जाना अपने आप में सवाल पैदा करता है। वह भी तब जब अमेरिका ने खुद आईएस आतंकियों के हमले का अलर्ट तालिबान को मुहैया कराया था और अपनी सेनाओं के लिए भी अलर्ट जारी किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने हमले की सूचना से जुड़ी पूरी जानकारी तालिबान को दे दी थी।