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महामारी के बीच ओलंपिक क्यों, ब्रिटिश जर्नल के संपादकीय के बाद फिर उठे सवाल

Tue, 15 Jun 2021 04:29 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तोक्यो

सार

‘द लासेंट’ ने अपने संपादकीय में कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन और अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन जैसी संस्थाओं ने इस मामले में अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह नहीं किया है। पत्रिका ने चेतावनी दी है कि ओलंपिक खेलों के कारण कोरोना वायरस का जापान और दुनिया के दूसरे देशों में और भी तेजी से प्रसार हो सकता है...
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तोक्यो ओलंपिक - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) और जापान सरकार अगले 23 जुलाई से तोक्यो में ओलंपिक खेलों का आयोजन कराने के अपने इरादे पर अडिग है। लेकिन जारी कोरोना महामारी के बीच इन खेलों को कराने पर सवाल लगातार गहराते जा रहे हैं। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल ‘द लांसेट’ ने अब इस आयोजन पर ‘वैश्विक वार्ता’ की अपील कर इसमें एक नया पहलू जोड़ दिया है। जर्नल ने कहा है कि ये ‘वैश्विक वार्ता’ इस सवाल पर होनी चाहिए कि तोक्यो ओलंपिक खेलों को कैसे संभाला जाएगा। पत्रिका ने इस मामले में चुप्पी बरते रखने के लिए वैश्विक स्वास्थ्य संगठनों की कड़ी आलोचना भी की है।  

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‘द लांसेट’ के इस संपादकीय से जापान में उन लोगों को बल मिला है, जो ओलंपिक खेलों को रद्द करने की मांग लगातार दोहरा रहे हैं। इनमें जापान के डॉक्टरों के संगठन भी हैं, जिनकी राय है कि ये खेल कोरोना संक्रमण के लिहाज से सुपर स्प्रेडर साबित हो सकते हैं। जापान के स्वास्थ्य कर्मी इस बात को भी लेकर भी चिंतित हैं कि जिस समय उन्हें महामारी संभालने के लिए अतिरिक्त जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है, उसी समय ओलंपिक खेलों के दौरान उन पर काम का और भी ज्यादा बोझ डाल दिया जाएगा।

‘द लासेंट’ ने अपने संपादकीय में कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन और अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन जैसी संस्थाओं ने इस मामले में अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह नहीं किया है। पत्रिका ने चेतावनी दी है कि ओलंपिक खेलों के कारण कोरोना वायरस का जापान और दुनिया के दूसरे देशों में और भी तेजी से प्रसार हो सकता है। दुनिया भर में प्रतिष्ठित इस जर्नल ने आशंका जताई है कि ओलंपिक खेलों में आने वाले 15 हजार खिलाड़ी, हजारों सपोर्ट स्टाफ और अधिकारी इस मौके पर एक-दूसरे से मेलजोल करेंगे। इससे दुनिया में कोरोना संक्रमण की एक नई लहर आ सकती है। पत्रिका ने ध्यान दिलाया है कि ऐसी कोई शर्त नहीं रखी गई है कि जिन लोगों ने टीका नहीं लिया है, उन्हें ओलंपिक खेलों में नहीं आने दिया जाएगा।
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यही बात कई दूसरे विशेषज्ञ भी कहते रहे हैं। यहां तक कि जापान की कुछ बड़ी कंपनियों ने भी मौजूदा हालात में इन खेलों के आयोजन पर आपत्ति जताई है। आरोप लगाया है कि आईओसी ब्रॉडकास्टर और स्पॉन्सर कंपनियों के दबाव में खिलाड़ियों और अधिकारियों की सेहत को खतरे में डाल रही है। द लासेंट ने भी कहा है कि ओलंपिक्स के आयोजन से जापान में कोविड-19 महामारी की स्थिति और बिगड़ सकती है।

गौरतलब है कि अब ओलंपिक खेलों की शुरुआत में 40 दिन भी नहीं रह गए हैं, जबकि टोक्यो में अभी महामारी के कारण आपातकाल लागू है। इसी कारण हाल में आए तमाम जनमत सर्वेक्षणों में जापान के ज्यादातर लोगों ने मौजूदा हाल में ओलंपिक कराने से असहमति जताई है। आईओसी का दावा है कि ओलंपिक खेलों का आयोजन सुरक्षित माहौल मे होगा। इसके लिए जरूरी कदम उठाए गए हैँ। आयोजकों ने कहा है कि इसी हफ्ते वे खेलों के दौरान अपनाए जा रहे नियमों की पुस्तिका का तीसरा संस्करण जारी करेंगे। इसमें संक्रमण से बचने के उपायों के साथ-साथ दूसरी संबंधित जानकारियां होंगी। आईओसी ने उम्मीद जताई है कि इन खेलों में आने वाले लगभग 80 फीसदी खिलाड़ी और कोच ऐसे होंगे, जिनका टीकाकरण हो चुका होगा।

लेकिन ‘द लांसेट’ ने कहा है कि इस बारे में वैश्विक चर्चा तुरंत शुरू होनी चाहिए। पत्रिका ने कहा है- ‘कोविड-19 महामारी और खेलों की सुरक्षा के साथ सभी देशों के हित जुड़े हैं। इसके बावजूद इस बारे में सारी चर्चा आईओसी और जापान सरकार के ऊपर छोड़ दी गई है। जबकि खेलों से जुड़े जोखिम और उन्हें कैसे संभाला जाएगा, उस बारे में व्यापक रूप से बात होनी चाहिए।’

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