आव्रजन और नीति विशेषज्ञों ने अमेरिकी सांसदों के एक पैनल के सामने कहा है कि अमेरिका की आव्रजन नीतियां 90 के दशक की हैं। जबकि इन वर्षों में दुनिया बदल गई, लेकिन नीतियां वही रहीं है। इस वजह से भारतीयों की पसंद अब अमेरिका की जगह कनाडा बन गई है।
अमेरिका का ग्रीन कार्ड हासिल करने के लिए लगी है लंबी कतार
आव्रजन और नागरिकता पर हाउस ज्यूडिशियरी समिति-उपसमिति के सामने बयान देते हुए, नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी के स्टुअर्ट एंडरसन ने कहा कि बैकलॉग बढ़ रहा है और एक दशक के भीतर, 20 लाख से अधिक लोग ग्रीन कार्ड के लिए लाइन में इंतजार कर रहे होंगे और उन्हें सालों और दशकों तक इंतजार करना पड़ सकता है।
पीटीआई के मुताबिक एंडरसन ने कहा, भारतीयों के लिए सभी तीन रोजगार-आधारित श्रेणियों (ईबी 1, ईबी 2, ईबी 3) के लिए कुल बैकलॉग वर्तमान में 9,15,497 व्यक्तियों से बढ़कर एक अनुमान के हिसाब से 2030 तक 21,95,795 लोगों तक पहुंच जाएगा। मार्च 2021 में, वित्त वर्ष 2022 के लिए नियोक्ताओं ने केवल 85,000 H-1B आवेदनों के कैप चयन के लिए 3,08,613 H-1B पंजीकरण कराया, जिसका साफ तौर पर मतलब है कि कुशल विदेशी नागरिकों के लिए H-1B पंजीकरण के 72 प्रतिशत मामले आवेदन के मूल्यांकन से पहले ही खारिज कर दिए गए।
कनाडा में स्थायी निवास हासिल करना ज्यादा आसान
दूसरी ओर, अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के लिए अस्थायी स्थिति में काम करना और फिर कनाडा में स्थायी निवास प्राप्त करना आसान होता है। उत्तरी अमेरिका की प्रौद्योगिकी परिषदों के सीईओ जेनिफर यंग ने कहा कि महामारी से पहले कनाडा के आव्रजन नियमों ने कंपनियों को चार सप्ताह के ले उच्च कुशल विदेशी प्रतिभाओं को नियुक्त करने की अनुमति दी है।