भारत से थाईलैंड पहुंचे भगवान बुद्ध से अवशेष
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थाईलैंड का यह आयोजन इसलिए भी खास है क्योंकि इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है। हर दिन शाम 5 बजे (स्थानीय समयानुसार) बौद्ध मंत्रोच्चार समारोह होगा। बौद्ध धर्म से जुड़े लोगों के बीच इसे सौभाग्य बढ़ाने के प्रतीक रूप में देखा जाता है। सारिपुत्त और मोग्गल्लाना के अवशेषों के साथ-साथ लोग भगवान बुद्ध के अवशेषों को श्रद्धांजलि देने भी आएंगे। क्षेत्रीय विशेषताओं के आधार पर बौद्ध मंत्रों के जाप के लिए भव्य समारोह आयोजित होगा। थाईलैंड के राजा महा वजिरालोंगकोर्न फ्रा वजिराक्लाओचाओयुहुआ (Maha Vajiralongkorn Phra Vajiraklaochaoyuhua) के 72वें जन्मदिन के अवसर पर भारत से पवित्र अवशेष थाईलैंड भेजे गए हैं। थाईलैंड के संस्कृति मंत्रालय ने पहले कहा था कि यह इतिहास में पहली बार होगा जब बौद्ध और पड़ोसी देश बुद्ध के अवशेषों को श्रद्धांजलि देने जमा होंगे।
अवशेषों के साथ बिहार के राज्यपाल आरवी आर्लेकर और केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार (पीआईबी)
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ऐतिहासिक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध प्रदर्शनी कार्यक्रम के तहत अवशेषों को पूरे थाईलैंड में कई स्थानों पर ले जाया जाएगा। इससे भक्तों और बौद्ध धर्मावलंबी लोगों को अवशेषों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर दिया जा सकेगा। इन पवित्र अवशेषों को 19 मार्च को थाईलैंड से उनके संबंधित स्थानों तक वापस ले जाया जाएगा।
किन जगहों पर कितने दिन दर्शन होंगे-
- सनम लुआंग पवेलियन, बैंकॉक: 22 फरवरी 2024 - 3 मार्च 2024 (11 दिन)
- हो कुम लुआंग, रॉयल राजप्रुक, चियांग माई: 4 मार्च 2024 - 8 मार्च 2024 (5 दिन)
- वाट महा वानाराम, उबोन रतचथानी: 9 मार्च 2024 - 13 मार्च 2024 (5 दिन)
- वाट महाथाट, औलुएक, क्राबी: 14 मार्च 2024 - 18 मार्च 2024 (5 दिन)
थाईलैंड में भारत से पहुंचे अवशेष
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भारतीय वायुसेना के एक विशेष विमान से थाईलैंड लाए गए अवशेषों को 'राजकीय अतिथि' का दर्जा दिया गया है। ऐसा पहली बार होगा जब भगवान बुद्ध और उनके शिष्यों के अवशेषों को एक साथ प्रदर्शित किया जाएगा। बिहार के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर और केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार के नेतृत्व में 22 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल अवशेषों के साथ थाईलैंड गया है।