जापान में सत्ताधारी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) के नेता के चुनाव में हो रही कड़ी टक्कर देखते हुए इस बारे में कोई अनुमान लगाना कठिन हो गया है। नया नेता प्रधानमंत्री योशिहिडे सुगा की जगह एलडीपी का नेतृत्व संभालेगा। इस बीच नेता पद की होड़ में जुटे नेताओं पर पार्टी में यह अंदरूनी दबाव बढ़ गया है कि वे एक-दूसरे की आलोचना करने में संयम बरतें। इसकी वजह अगला संसदीय चुनाव है। पार्टी के एक हिस्से की राय है कि एक दूसरे की कमजोरियों को उजागर करने से आम चुनाव में पार्टी को नुकसान हो सकता है।
अखबार जापान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक एलडीपी के युवा नेता चाहते हैं कि किसी लोकप्रिय नेता को पार्टी की कमान मिले। नेता ऐसा होना चाहिए, जिसकी कोरोना महामारी से देश को निकालने की क्षमता पर लोग भरोसा करें और साथ ही जो पार्टी में गुटबाजी खत्म कर सके। जापान की वासेदा यूनिवर्सिटी में पॉलिटिकल साइंस के प्रोफेसर एत्सुशी तनिफुजी ने जापान टाइम्स से कहा- ‘एलडीपी को अवश्य ही इस बात का ख्याल करना होगा कि उसके नेता के प्रति आम लोगों की क्या सोच है। अगर एलडीपी पार्टी के गुटों के बीच तालमेल बनाने को तरजीह देती है और नेता के चुनाव में जनमत का ख्याल नहीं करती, उसके जन समर्थन में कमी आएगी और आम चुनाव में उसे कई सीटों का नुकसान होगा।’
एलडीपी में कई गुट हैं। उनमें सबसे मजबूत होसोदा गुट है, जिसके समर्थन से सुगा नेता चुने गए थे। उसके अलावा वित्त मंत्री तारो असो और वतारू ताकेशिता के गुट भी मजबूत माने जाते हैं। एलडीपी की नीति अनुसंधान परिषद के पूर्व अध्यक्ष फुमियो किशिदा, पूर्व रक्षा मंत्री शिगेरू इशिबा, और एलडीपी के पूर्व महासचिव नोबुतेरू इशिहारा के गुट भी नेता पद के चुनाव में अहम भूमिका निभाते हैं।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक नेता पद के चुनाव में असल मुकाबला फुमियो किशिदा, टीकाकरण मंत्री तारो कोनो, पूर्व संचार मंत्री सनाए ताकाइची और एलटीडी के कार्यकारी महासचिव सीको नोडा के बीच है। इन चारों ने कहा है कि अगर वे नेता बने, तो वे नए मंत्रिमंडल का गठन करेंगे। ऐसा करते समय वे दूसरे गुटों की तरफ से सुझाए गए नामों का भी ख्याल रखेंगे।
जापान की न्यूज एजेंसी क्योदो के एलडीपी कार्यकर्ताओं के बीच किए एक सर्वे के मुताबिक पार्टी के भीतर सबसे ज्यादा समर्थन तारो कोनो को मिल रहा है। पार्टी के 48.6 फीसदी कार्यकर्ताओं ने कहा कि एलडीपी का नेतृत्व करने के लिए वही सबसे सटीक उम्मीदवार हैं। सर्वे में किशिदा को 18.5 फीसदी कार्यकर्ताओं का समर्थन मिलता बताया गया है।
एलडीपी के चुनाव में पार्टी के हर उस कार्यकर्ता को वोट डालने का अधिकार है, जिसने सदस्यता शुल्क चुकाया हो। लेकिन कार्यकर्ताओं के तमाम वोटों का मूल्य एलडीपी के डियेट (संसद) के सदस्यों के वोट के बराबर होता है। इसलिए डिएट के सदस्यों के बीच ज्यादा समर्थन पा लेने वाला नेता कार्यकर्ताओं में कम लोकप्रियता के बावजूद चुनाव जीत सकता है। में एलडीपी के 382 सदस्य हैं। इसलिए कार्यकर्ताओं में तारो कोनो की अधिक लोकप्रियता के बावजूद उनकी जीत पक्की नहीं मानी जा रही है।