अफगानिस्तान की सत्ता हड़पने के बाद तालिबान ने नई सरकार के मॉडल के बारे में बताया है। उसने बताया कि नई सरकार में महिलाओं के अधिकारों का सम्मान किया जाएगा। तालिबान के एक प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी रायटर्स को बताया कि महिलाओं को अकेले घर छोड़ने की अनुमति होगी। उन्हें पढ़ाई-लिखाई और काम करने की इजाजत दी जाएगी। हालांकि, उन्हें हिजाब पहनना होगा। मीडिया को किसी की भी आलोचना करने की इजाजत होगी, लेकिन उन्हें किसी की छवि के साथ खिलवाड़ नहीं करने की मंजूरी नहीं दी जाएगी।
विद्रोही संगठन ने रायटर्स को बताया कि तालिबान लड़ाकों को अभी जश्न में गोलियां चलाने की अनुमति दी गई है, क्योंकि शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण के लिए बातचीत अभी भी चल रही है। तालिबान ने कहा कि अगर विदेशी चाहें तो शहर में जा सकते हैं। लेकिन अगर वे रहना जारी रखते हैं, तो उन्हें तालिबान प्रशासकों के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी।
तालिबान के शासन में महिलाओं पर अत्याचार ज्यादा
तालिबान की वापसी से सबसे ज्यादा खौफ अफगान महिलाओं में है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हाल ही में जब कंधार में तालिबान लड़ाके अज़ीज़ी बैंक में घुसे, तो उन्होंने वहां काम कर रहीं महिलाओं को घर जाने का आदेश दे दिया। तालिबान ने कहा कि उनकी जगह पुरुष रिश्तेदार काम करने आ सकते हैं।
1996 से 2001 तक अफगानिस्तान पर शासन किया
तालिबान ने 1996 से 2001 तक अफगानिस्तान पर शासन किया था। उस दौरान तालिबान ने अपने अत्याचारों की वजह से पूरी दुनिया के निशाने पर आ गया था। पहले के शासन में कोड़े मारना, पत्थर मारना तालिबान की सजा के सामान्य रूप थे। हालांकि, तालिबानी प्रवक्ता के हवाले से रायटर्स ने बताया कि सजा पर नीति अदालतों पर निर्भर करेगी।
तालिबान ने फिर जारी किया बयान
टोलो न्यूज के मुताबिक, तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने कहा कि लूट और अराजकता को रोकने के लिए उनकी सेना काबुल के कुछ हिस्सों में प्रवेश करेगी और उन चौकियों पर कब्जा कर लेगी, जिन्हें सुरक्षा बलों ने खाली करा लिया है। उन्होंने लोगों से कहा कि वे शहर में प्रवेश करने से घबराएं नहीं।
अफगान सेना पर उठे सवाल
हफ्तेभर के अंदर ही तालिबान ने लगभग पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया है। इससे अफगान सेना पर सवालिया निशान लग गया है। जिनके भरोसे अशरफ गनी सेना को फिर से संगठित करने का दावा कर रहे थे, उन्होंने पिछले कुछ दिनों में तालिबान के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। अब अफगान सरकार के सामने सत्ता हस्तांतरण के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।