बीते कुछ महीने अफगानिस्तान के लिए काले पन्नों की तरह रहे हैं। इस दौरान हुई भीषण हिंसा की घटनाओं में कितने ही नागरिकों, नेताओं, पत्रकारों और कार्यकर्ताओं की हत्या हुई। अमेरिकी सुरक्षा बलों की यहां से वापसी के साथ ही शुरू हुए इस हिंसा के दौर को रोकने में अफगान सरकार विफल रही। इस रिपोर्ट में जानिए कि सैन्यबल के मामले में अफगानिस्तान और तालिबार कहां पर हैं और क्यों अफगानिस्तान को तालिबान के सामने घुटने टेकने पड़े...
अफगानिस्तान में सत्ता परिवर्तन अब लगभग तय हो चुका है। तालिबान ने देश की सभी सीमाओं पर कब्जा करने के साथ ही राजधानी काबुल में प्रवेश कर लिया है। सूत्रों के अनुसार सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया की शुरुआत भी हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, नई अंतरिम सरकार के अंतरिम प्रमुख के रूप में अली अहमद जलाली का नाम सबसे आगे चल रहा है। तालिबान को सत्ता हस्तांतरित करने के लिए अफगान राष्ट्रपति भवन एआरजी में में बातचीत चल रही है।
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अफगानिस्तान के सुरक्षा बलों में अधिकारियों की अधिकृत संख्या तीन लाख 52 हजार है। जुलाई, 2020 तक अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय में अधिकारियों की संख्या एक लाख 85 हजार 478 थी। इसके तहत सेना, वायु सेना और स्पेशल ऑपरेशन फोर्सेज (एसओएफ) आती हैं। अफगानिस्तान के आंतरिक मंत्रालय में यह संख्या एक लाख तीन हजार 224 है। इसके तहक विभिन्न पुलिस बल आते हैं। इन्हें मिलाएं तो सुरक्षा बलों के कुल अधिकारियों की संख्या दो लाख 88 हजार 702 बैठती है। साल 2019 में जारी किए गए अफगान नेशनल आर्मी (एएनए) के आंकड़ों के अनुसार अफगानिस्तान की सेना में करीब एक लाख 80 हजार सैनिक हैं।
तालिबान के सदस्यों की तय संख्या के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है फिर भी माना जाता है कि इसके सदस्यों की संख्या 50 हजार से एक लाख के बीच हो सकती है। एक रिपोर्ट के अनुसार तालिबान के कुल सदस्यों की संख्या दो लाख से अधिक है और इनमें से करीब 60 हजार मुख्य लड़ाके हैं। इसके अलावा 90 हजार स्थानीय लड़ाके हैं और सामग्रियों की आपूर्ति करने वालों और अन्य सहयोग पहुंचाने वालों की संख्या दसियों हजार है। अमेरिका ने साल 2014 में तालिबान के लड़ाकों की संख्या 20,000 के आस-पास बताई थी। ऐसे में आंकड़ों में तुलना करें तो समय के साथ तालिबानी लड़ाकों की संख्या में तेज इजाफा देखने को मिला है।