ऐसी कई महिलाएं हैं, जिनका घर उनकी कमाई से ही चलता है। काबुल के बीबी सारा खैरखाना स्कूल में 15 साल से 12वीं कक्षा को पश्तो पढ़ाने वाली खतारा इन्हीं शिक्षिकाओं में से एक हैं। उनका कहना है, शिक्षा मंत्रालय ने अगले आदेश तक स्कूल न आने को कहा है। अगर किसी शिक्षित महिला का ही सम्मान नहीं होगा तो फिर किसका होगा। हम अपना घर-परिवार कैसे चलाएंगे।
लड़कियों की स्कूल पाबंदी पर यूनेस्को और यूनिसेफ चिंतित
संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक व सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) तथा यूएन बाल कोष (यूनिसेफ) ने अफगान लड़कियों के स्कूल बंद करने को शिक्षा के मौलिक अधिकार का उल्लंघन बताया है। यूनेस्को के महानिदेशक आद्रे अजोले ने कहा, स्कूलों में लड़कियों को लौटने की अनुमति नहीं दी जाती है तो इसके व्यापक नतीजे होंगे।
टोलो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, अजोले ने कहा, माध्यमिक विद्यालय में लड़कियों की देरी से वापसी से उन्हें शिक्षा और अंतत: जीवन में पीछे छूटने का जोखिम हो सकता है। यूनिसेफ प्रमुख हेनरीटा फोर ने एक बयान में कहा, हम इससे चिंतित हैं कि कई लड़कियों को स्कूल वापस जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। फोर ने कहा कि लड़कियों को पीछे नहीं रहना चाहिए।