मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी हथियार बड़ी मात्रा में पाकिस्तान भेजे जा रहे हैं। इन रिपोर्टों के आधार पर भारतीय सैन्य अधिकारियों का कहना है कि इन हथियारों को अंततः भारत विरोधी आतंकी गुटों को दिया जा सकता है।
तालिबान द्वारा अफगानिस्तान में लूटे गए 6.5 लाख से ज्यादा अमेरिकी हथियारों का इस्तेमाल पहले पाकिस्तान में हो सकता है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के पाले आतंकी इनसे देश में हिंसा फैला सकते हैं। इसके बाद, इनका इस्तेमाल भारत के खिलाफ भी हो सकता है।
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एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के अनुसार अमेरिकी हथियारों को तालिबान अफगान सेना से छीनकर पाकिस्तान को मुहैया करवा रहा है। वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के अनुसार, आतंकियों के पास यह हथियार अगर पहुंचते हैं, तब भी भारतीय सुरक्षा बल इनसे निपटने में पूरी तरह सक्षम और तैयार हैं। इसके लिए आतंक विरोधी ग्रिड व्यवस्था बनाई गई है। यह एलओसी और कश्मीर घाटी के आंतरिक हिस्सों में कायम की गई है।
भारतीय फौज को तालिबान से लड़ने का अनुभव : आशंका है कि पाकिस्तानी सेना तालिबानी आतंकियों का इस्तेमाल भारत में आतंकवाद को बढ़ावा देने में कर सकती है। इस पर भारतीय सैन्य अधिकारियों का कहना है कि नब्बे के दशक के अधिकतर वरिष्ठ सैन्य अधिकारी इन आतंकियों से लड़ने का अनुभव रखते हैं।
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वहीं इन आतंकियों को कश्मीर घाटी में तलाशना आसान होता है। क्षेत्रीय नागरिक महिलाओं और कम उम्र लड़कियों से इन आतंकियों द्वारा की जाने वाली बदसलूकी की वजह से उन्हें नापसंद करते हैं, उनसे डरते भी हैं। अधिकतर को क्षेत्रीय लोग पकड़वा देते हैं।
कश्मीर में आतंकवाद के शुरुआती दिनों में पाकिस्तान ने बड़ी संख्या में अफगान और विदेशी आतंकियों का भारत के खिलाफ इस्तेमाल किया था। ये आतंकी सोवियत युद्ध के बाद भारत भेजे गए थे। अधिकतर को भारतीय बलों ने खत्म कर दिया था।