अफगानिस्तान की सत्ता पर अपने पैर जमा लेने के बाद धीरे-धीरे तालिबान खुद को एक सरकार के तौर पर स्थापित कर रहा है। रविवार को तालिबानी लड़ाकों की ओर से काबुल में एक सैन्य परेड निकाली गई। खास बात यह है कि इस परेड में तालिबानी लड़ाकों के हाथ में अमेरिकी हथियार और बख्तरबंद वाहन दिखाई दिए। इसके अलावा मिलिट्री परेड में जिन हेलीकॉप्टरों का प्रयोग किया गया वह भी रूस द्वारा निर्मित थे।
दरअसल, अफगानिस्तान से अमेरिका की सैन्य वापसी के बाद तालिबान उनके द्वारा छोड़े गए हथियारों का प्रयोग कर रहा है। रविवार की परेड़ में तालिबानी सैनिक अमेरिका द्वारा निर्मित एम117 बख्तरबंद वाहनों में दिए तो उनके हाथों में भी अमेरिका की बनाई हुई एम-4 असॉल्ट राइफल थी। तालिबानी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि यह परेड 250 प्रशिक्षित सैनिकों की स्नातक की पढ़ाई पूरी होने से जुड़ी थी।
तालिबान के खिलाफ होना था हथियारों का प्रयोग
तालिबानी मिलिट्री परेड में जो हथियार दिखाई दिए, उनका प्रयोग तालिबान के खिलाफ ही होना था। वाशिंगटन ने अफगानिस्तान सेना को बड़ी मात्रा में हथियारों की सप्लाई तालिबान से लोहा लेने के लिए की थी, लेकिन काबुल पर कब्जा करने के बाद धीरे-धीरे तालिबान ने हथियारों के इस जखीरे को अपने कब्जे में ले लिया। तालिबान के अधिकारियों का कहना है कि अफगान सेना के सैनिकों, पायलटों, तकनीकी विशेषज्ञों को तालिबान सेना में शामिल किया जाएगा।
28 अरब डॉलर के हथियार
एक रिपोर्ट में सामने आया था कि अमेरिका ने 2002 से 2017 के बीच अफगानिस्तान में 28 अरब डॉलर से ज्यादा के हथियार, बख्तरबंद वाहन, हेलीकॉप्टर, डिफेंस सिस्टम, गोला बारूद मुहैया कराया था। अमेरिकी सैन्य वापसी के बाद कई हथियार वहीं छूट गए। बताया जा रहा है कि अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान से वापसी से पहले 70 से ज्यादा एयरक्राफ्ट, वाहनों और गोला-बारूद को नष्ट कर दिया था। इतना ही नहीं अमेरिकी सैनिकों ने एयर डिफेंस सिस्टम को भी खत्म कर दिया था।