15 अगस्त को अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद तालिबान वहां एक समावेशी सरकार बनाने का दावा कर रहा है। भविष्य की सरकार का स्वरूप कैसा होगा इसे तय करने और मंत्रियों के चुयन के लिए तालिबान एक सर्वोच्च नेतृत्व परिषद के गठन की तैयारी में है। माना जा रहा है कि यही नेतृत्व परिषद अफगानिस्तान पर शासन करेगी। हालांकि इसकी संरचना क्या होगी और यह कैसे काम करेगा इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि यह परिषद अनिश्चित काल के लिए बनेगी या अंतरिम अवधि के लिए।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक तालिबान का सह-संस्थापक मुल्ला अब्दुल गनी बरादर राजधानी काबुल में हैं और मुल्ला मोहम्मद याकूब के साथ मिलकर सरकार गठन की योजना बना रहा है। 30 साल का याकूब वर्तमान में समूह के सैन्य अभियानों का नेता है और सरकार गठन में विशेष भूमिका निभा रहा है। वह प्रमुख मंत्रालयों जैसे आंतरिक सुरक्षा, रक्षा, विदेश मामले, वित्त, सूचना और काबुल के मामलों के लिए खास रणनीति पर काम कर रहा है। मंत्रियों के चयन से लेकर विभागों में बंटवारे में वह खास दिलचस्पी ले रहा है।
इन मंत्रालयों को संभालने के लिए तालिबान और हक्कानी नेटवर्क के कई शीर्ष के नेताओं के नाम पर विचार चल रहा है। मिली जानकारी के मुताबिक तालिबान भ्रष्टाचार से लड़ने और भ्रष्ट अधिकारियों को सजा देने के लिए स्थानीय स्तर पर विशेष अदालतें स्थापित करने पर विचार कर रहा है। वहीं तालिबान देश में प्रवेश के स्थान से लेकर गंतव्य तक सामान लाने के लिए एकल शुल्क लागू करने की योजना भी बना रहा है।
तालिबान पर भरोसा बिल्कुल नहीं
नाम नहीं लिखे जाने की शर्त पर अफगानिस्तान के एक वरिष्ठ पत्रकार ने बताया तालिबान की बड़ी-बड़ी बातों पर भरोसा बिल्कुल नहीं किया जाना चाहिए। विद्रोही लड़ाकों के इस कट्टर शासन में नागरिक स्वतंत्रता को सबसे बड़ा खतरा पहुंचा है और आगे भी पहुंचने वाला है। तालिबान के पास इस बार अधिक राजनीतिक नियंत्रण और जनशक्ति है। साथ ही अफगान बल और अमेरिकी सैनिकों के छोड़े गए हथियार और उपकरण भी बड़ी मात्रा में उसके हाथ लग गए हैं, जिससे तालिबान पहले के मुकाबले खुद को ज्यादा ताकतवर मान रहा है। उस सरकार का कोई मतलब नहीं जिसमें बहुदलीय चुनाव न हों या जिसमें विभिन्न राजनीतिक और जातीय हितधारकों को शामिल नहीं किया जाए।
बंदूक की नोक पर बनने वाली सरकार होगी
अफगानिस्तान की स्वतंत्र पत्रकार साजिया शोजाई इस सरकार को बंदूक के नोक पर बनने वाली सरकार कहतीं हैं, जो हिंसा और जोर-जबरदस्ती के बल पर अफगानिस्तान में शासन करना चाहते हैं। उनका कहना है कि निश्चित तौर पर अफगानिस्तान में लोगों की पसंद वाली सरकार नहीं होगी। देश की 98 फीसदी आबादी ऐसी सरकार को नहीं पसंद करेगी, क्योंकि तालिबान के पुराने शासन से हमें बहुत खराब अनुभव रहा है। वे कितना भी कहें कि हम बदल गए हैं लेकिन किसी भी अमन पसंद अफगान नागरिक को उन पर भरोसा नहीं हो सकता। वे बंदूक और हिंसा के दम पर सरकार चलाएंगे और दमनकारी नीति अपनाएंगे।