पर्यवेक्षकों के मुताबिक ये बातें साफ करती हैं कि दोनों राष्ट्रपतियों की बातचीत में ज्यादा समय शिकवा-शिकायतें जताने और उन पर सफाई देने ही गुजरा। ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक बाइडन ने शी से मुलाकात का आग्रह एक खास वजह से किया। उनके मुताबिक व्हाइट हाउस के अधिकारी इस निष्कर्ष पर थे कि हाल में जिन चीनी अधिकारियों का अमेरिकी अधिकारियों से संपर्क हुआ, वे कोई ‘गंभीर या ठोस’ बातचीत करने को लेकर अनिच्छुक थे। बताया जाता है कि बाइडन ने इस गतिरोध को तोड़ने की कोशिश में शी को फोन करने का फैसला किया।
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के सलाहकार रह चुके और अब अमेरिका की जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में एशियाई मामलों के विशेषज्ञ प्रोफसर इवान मेडियरोस ने फाइनेंशियल टाइम्स से कहा कि इस फोन वार्ता से दोनों राष्ट्रपति की निजी मुलाकात का रास्ता खुल सकता है। उन्होंने कहा- ‘ऐसे आपसी होड़ वाले संबंध के बीच शिखर स्तर की कूटनीति एक जरूरी पहल है, ताकि प्रतिस्पर्धा को ठीक ढंग से संभाला जा सके। बाइडन और शी के बीच बातचीत हुए सात महीने गुजर चुके थे और ये सात महीने बेहद कठिन रहे हैं। अब समय आ गया जब दोनों नेता स्थितियों को अपने नियंत्रण में लें।’
लेकिन ये कई सवाल पूछा जा रहा है कि ये समय अब आया है, ऐसी समझ व्हाइट हाउस में क्यों बनी? विश्लेषकों ने संभावना जताई है कि अफगानिस्तान में बने प्रतिकूल हालात की वजह अमेरिका-चीन के साथ शिखर स्तर पर संपर्क बनाने को प्रेरित हुआ हो सकता है। अब ये साफ हो गया है कि तालिबान चीन की चिंताओं को दूर करते हुए अफगानिस्तान में उसे बड़ी भूमिका देने पर राजी हो गया है। उसने चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव से जुड़ने की इच्छा भी खुलेआम जता दी है। ऐसे में मुमकिन है वहां की घटनाओं को प्रभावित करने में बाइडन प्रशासन को चीन की उपयोगिता महसूस हुई हो।