इस बीच देश में कारोबार खोलने की मांग तेज हो रही है। हाल के वर्षों में वियतनाम ने ‘दुनिया के भरोसेमंद कारखाने’ के रूप में प्रतिष्ठा हासिल की थी। लेकिन अब महामारी के कारण निवेशकों के यहां से भागने की आशंका पैदा हो गई है। रेटिंग एजेंसी फिच ने 2021 में वियतनाम के जीडीपी की वृद्धि दर छह फीसदी रहने का अनुमान जताया था। लेकिन एक ताजा बयान में उसने कहा कि अब ये दर हासिल होने की राह में महामारी बड़ी बाधा बन गई है।
वेबसाइट निक्कई एशिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक वियतनाम एशिया के उन देशों में है, जो मुक्त व्यापार के लिए सबसे ज्यादा खुले हुए हैं। पश्चिमी देश उसकी इस छवि को बनाए रखना चाहते हैं। इसलिए महामारी के इस वक्त में म्यांमार को काफी विदेशी सहायता मिली है। ब्रिटेन, जर्मनी, इटली और पोलैंड ने हाल के हफ्तों में बड़ी संख्या में कोरोना वैक्सीन का अनुदान वियतनाम को भेजा है। यूरोपीय देशों ने कुल मिल कर अगस्त में वैक्सीन के 15 लाख डोज वियतनाम भेजे। अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया से भी वियतनाम को वैक्सीन की मदद मिली है।
जुलाई तक वियतनाम सरकार चीनी से मदद लेने से इनकार कर रही थी। लेकिन अब उसने चीन से आई वैक्सीन की खेप को भी स्वीकार कर लिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीन की मदद पहुंचने के बाद अब देश में टीकाकरण की रफ्तार तेज हो सकती है। लेकिन इस बीच ‘कोविड बीटर’ यानी कोविड-19 को परास्त करने वाले देश के रूप में वियतनाम की प्रतिष्ठा तार-तार हो चुकी है।