श्रीलंका सरकार ने अमेरिकी संस्था मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन (एमसीसी) की 48 करोड़ डॉलर की सहायता देने की पेशकश को स्वीकार कर लिया है। एमसीसी ने श्रीलंका के सामने ये पेशकश दो साल पहले की थी। लेकिन तब से ये प्रस्ताव लटका हुआ था। एमसीसी से 50 करोड़ डॉलर की सहायता लेने को लेकर नेपाल में भी लंबे समय तक विवाद चला था। लेकिन पिछले साल वहां की शेर बहादुर देउबा सरकार ने एमसीसी से हुए करार के संसदीय अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी करा ली। नेपाल में आरोप लगा था कि एमसीसी की मदद अमेरिका की इंडो-पैसिफिक सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है।
श्रीलंका को जो मदद मिलेगी, उसमें पांच करोड़ 70 लाख डॉलर श्रीलंका और अमेरिका सरकारों के बीच होने वाले एक करार का हिस्सा होगा। अमेरिका ये रकम ‘लोकतांत्रिक सुशासन और सामाजिक साख कायम करने’ के क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग बढ़ाने के मकसद से देगा। साथ ही इसमें टिकाऊ आर्थिक विकास का रास्ता तैयार करने का लक्ष्य भी शामिल किया गया है।
श्रीलंका के मंत्रिमंडल में अमेरिकी मदद स्वीकार करने का प्रस्ताव प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने रखा। उन्होंने बताया कि पांच करोड़ 70 लाख डॉलर की सहायता पाने के लिए श्रीलंका सरकार और अमेरिका के बीच एक नया समझौता होगा। ये रकम यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (यूएसएड) उपलब्ध कराएगी। यूएसएड अमेरिकी विदेश मंत्रालय के तहत काम करने वाली एजेंसी है।
श्रीलंका को एमसीसी करार के तहत मदद देने का प्रस्ताव सबसे पहले डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने रखा था। लेकिन राष्ट्रपति राजपक्षे ने नवंबर 2021 में कहा कि उनकी सरकार कभी भी एमसीसी के करार पर दस्तखत नहीं करेगी। इसके बाद अमेरिका ने इस करार से संबंधित प्रस्ताव को वापस ले लिया था। लेकिन श्रीलंका की आर्थिक मुसीबत के समय में अब उस प्रस्ताव को पुनर्जीवित किया गया है।
श्रीलंका सरकार देश को इस मुसीबत से निकालने के लिए कई अप्रिय फैसले ले रही है। एक ताजा निर्णय में उसने बाहर जाकर करने की इच्छुक महिलाओं की पारिवारिक पृष्ठभूमि की जांच की शर्त हटा दी है। सरकारी सूत्रों ने कहा है कि इस तरह की जांच रिपोर्ट में आने में काफी वक्त लगता है। जबकि इस समय श्रीलंका की जरूरत यह है कि देश के लोग बाहर जाकर कमाएं और वापस विदेशी मुद्रा भेजें।