श्रीलंका के विदेश मंत्री जी एल पेरिस ने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर से कहा है कि उनका देश नस्लीय युद्ध के बाद के मुद्दों से निबटने पर काम कर रहा है और इसमें लिट्टे के कैदियों को छोड़ने और विवादित आतंकरोधी कानून पर पुनर्विचार करना शामिल है। दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक से इतर द्विपक्षीय मुलाकात की।
श्रीलंका के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि बैठक के दौरान जयशंकर का इस बात पर जोर था कि नस्लीय अनसुलझे मसलों को निष्पक्ष और न्यायोचित रूप से सुलझाना दोनों ही देशों के हित में है। हालांकि भारतीय विदेश मंत्री ने ये भी कहा कि भारत-श्रीलंका के रिश्ते को किसी एक मसले तक सीमित नहीं होना चाहिए। श्रीलंकाई विदेश मंत्री ने जयशंकर को उन तथ्यपरक और स्पष्ट कदमों की जानकारी दी जो श्रीलंका 2009 में नस्लीय युद्ध की समाप्ति के बाद से ही लंबित मसलों को सुलझाने के लिए उठा रहा है।
उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और न्याय मंत्रालय मुख्य मसलों को सुलझाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। इसके तहत आतंकरोधी कानून पर पुनर्विचार करना, लिट्टे के कैदियों को रिहा करना और मिसिंग पर्सन ऑफिस, क्षतिपूर्ति विभाग, राष्ट्रीय एकता और मेलमिलाप विभाग, श्रीलंका मानवाधिकार आयोग जैसे स्वायत्त संस्थानों को और ताकतवर बनाने जैसे कदम शामिल हैं।
लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (लिट्टे) ने अलग तमिल देश की मांग को लेकर श्रीलंका की सरकार के खिलाफ लंबे समय तक हिंसक आंदोलन चलाया था जिसकी समाप्ति 2009 में लिट्टे के प्रमुख वेलुपिल्लई प्रभाकरण को श्रीलंका सेना द्वारा मार गिराने के साथ हुई थी। तमिल समुदाय और मानवाधिकार संगठन लंबे समय से 1979 में लागू किए गए आतंकवाद रोधी कानून को हटाने की मांग कर रहे हैं।
इनका कहना है कि ये कानून बेहद क्रूर है। लिट्टे के हिंसक आंदोलन के दौरान उसके कई लड़ाके इसी कानून के तहत पकड़े गए थे। श्रीलंका सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार तीन दशक से लंबे समय तक चले हिंसक युद्ध के दौरान कम से कम 20 हजार से अधिक लोग लापता हुए थे जबकि कम से कम एक लाख लोग इस युद्ध में मारे गए थे।
तमिलों का आरोप है कि युद्ध के आखिरी चरण में श्रीलंका सेना ने हजारों लोगों का कत्लेआम किया था। हालांकि श्रीलंकाई सेना इसका खंडन करती रही है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों का कहना है दावा है आखिरी चरण में कम से कम 40 हजार तमिल मारे गए थे जबकि श्रीलंका सरकार इस आंकड़े को गलत बताती रही है। पेरिस ने जयशंकर से मुलाकात में कहा कि कई मसलों पर उल्लेखनीय प्रगति हुई है और इस दिशा में और प्रयास जारी है।