प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को श्रीलंका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके को बधाई दी और कहा कि वह द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हैं। पीएम मोदी के बधाई संदेश पर राष्ट्रपति दिसानायके ने कहा कि, वह द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता से सहमत हैं।
श्रीलंका के नए राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने सोमवार को कहा कि, प्रधानमंत्री मोदी, आपका दयालु शब्दों और समर्थन के लिए धन्यवाद। मैं दोनों देशों के बीच के संबंधों को मजबूत करने की आपकी प्रतिबद्धता को साझा करता हूं। हम साथ मिलकर अपने लोगों और पूरे क्षेत्र के लाभ के लिए सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर सकते हैं। शनिवार के चुनाव में जीत के बाद दिसानायके ने सोमवार को श्रीलंका के नए राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली।
श्रीलंका में शनिवार को राष्ट्रपति पद के लिए वोट डाले गए था। रविवार को इन चुनाव के नतीजों का ऐलान किया गया। जिसमें जनता विमुक्ति पेरामुना (जेवीपी) पार्टी के नेता और नेशनल पीपुल्स पावर (एनपीपी) गठबंधन के उम्मीदवार 55 वर्षीय दिसानायके को विजेता घोषित किया गया। श्रीलंका के राष्ट्रपति पद चुनाव में मार्क्सवादी नेता दिसानायके ने निकटतम प्रतिद्वंद्वी समागी जन बालवेगया (एसजेबी) के साजिथ प्रेमदासा को हराया। पूर्व राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे की पार्टी तीसरे स्थान पर रही।
अनुरा कुमारा दिसानायके के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर बधाई दी। उन्होंने एक्स पर लिखा कि, श्रीलंका के राष्ट्रपति चुनाव में जीत पर अनुरा कुमारा दिसानायके को बधाई। भारत की पड़ोस प्रथम नीति और विजन सागर में श्रीलंका का एक विशेष स्थान है। मैं हमारे लोगों तथा पूरे क्षेत्र के लाभ के लिए हमारे बहुआयामी सहयोग को और मजबूत करने हेतु आपके साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूं।
भारतीय कंपनियों को हो सकती है दिक्कत
दिसानायके की पार्टी जेवीपी के भारत से मधुर संबंध नहीं रहे हैं। जेवीपी को भारत विरोधी व चीन समर्थक माना जाता है। वामपंथी दिसानायके आरोप लगा चुके हैं कि भारतीय डेयरी दिग्गज अमूल श्रीलंका की दर्जनों सरकारी डेयरियों को अपने कब्जे में लेने की योजना बना रही है। उन्होंने यह भी एलान किया था कि वह अदाणी समूह की पवन ऊर्जा परियोजना को रद्द कर देंगे। उन्होंने कहा था, यह श्रीलंका की ऊर्जा संप्रभुता का उल्लंघन करती है।
- दिसानायके की पार्टी ने 1987 के भारत-श्रीलंका समझौते का भी कड़ा विरोध किया। उनके सत्ता में आने के बाद अब भारतीय मूल के तमिल समुदाय की सुरक्षा और मछुआरों के प्रति नई सरकार के दृष्टिकोण को लेकर भी चिंता हो सकती है।
- श्रीलंका के अपने बंदरगाहों के चीन को सैन्य उपयोग के लिए इस्तेमाल करने की इजाजत भी भविष्य में परेशानी खड़ी सकती है।
भारतीय परियोजनाएं रद्द होने की संभावना कम
श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा पहले राजनयिक थे, जो दिसानायके से मिले। उन्होंने कहा, भारत दोनों देशों के लोगों की समृद्धि के लिए रिश्तों को गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। श्रीलंका चुनाव में भारत गैर पक्षपातपूर्ण रहा। हालांकि विक्रमसिंघे या प्रेमदासा की जीत से भारत को रणनीतिक रूप से अहम हिंद महासागर में पड़ोसी का हाथ थामने से ताकत मिलती। विशेषज्ञों का मानना है, कुछ परियोजनाओं पर दिसानायके फिर से विचार करने पर जोर दे रहे हों, पर उम्मीद कम ही है कि वह किसी भारतीय परियोजना को रद्द करेंगे क्योंकि ये परियोजनाएं लोगों की जरूरतों पर आधारित हैं।