यूके और भारतीय विश्वविद्यालयों के प्रमुख विशेषज्ञों ने मिर्गी के दौरों को रोकने में मदद करने के लिए इस सप्ताह भारत में मस्तिष्क की चोटों वाले शिशुओं पर दुनिया का सबसे बड़ा अध्ययन शुरू किया है। नवजात एन्सेफैलोपैथी को कम करके मिर्गी की रोकथाम (पीआरईवीईएनटी) अध्ययन इम्पीरियल कॉलेज लंदन के नेतृत्व में किया जाएगा।
इस अध्ययन का मकसद मस्तिष्क की चोटों वाले शिशुओं में मिर्गी के दौरे में कमी लाना है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रसव या प्रसव के दौरान मस्तिष्क की चोट आने के चलते बच्चों में मिर्गी के दौरे पड़ते हैं। इसके कारण शिशुओं में बेहोशी होती है।
बेहोश होने पर शिशुओं के दिमाग में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस जांच के निष्कर्ष ब्रिटेन और दुनिया भर के बच्चों के साथ-साथ भारत में भी लागू होंगे।