प्रक्षेपण के सीधे प्रसारण के फुटेज में नारो अंतरिक्ष केंद्र से 47 मीटर लंबा रॉकेट चमकीली पीली रोशनी के साथ हवा में ऊपर उठता हुआ दिखाई दिया। यह देश का एक मात्र अंतरिक्ष केंद्र है।
दक्षिण कोरिया ने अपने पहले स्वदेशी अंतरिक्ष रॉकेट का बृहस्पतिवार को परीक्षण किया। इसे अधिकारियों ने उपग्रह प्रक्षेपण कार्यक्रम की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि तीन-चरणों वाला नूरी रॉकेट 1.5 टन वजनी पेलोड को पृथ्वी से 600 से 800 किलोमीटर ऊपर कक्षा में ले जाने में सफल हो पाया या नहीं। यह पेलोड स्टेनलेस स्टील और एल्यूमिनियम से बना ब्लॉक है।
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इस प्रक्षेपण की निगरानी दक्षिण कोरिया के रष्ट्रपति मून जेइ-इन कर रहे थे। हालांकि प्रक्षेपण में एक घंटे का विलंब हुआ क्योंकि इंजीनियरों को रॉकेट के वाल्व जांचने में ज्यादा देर लगी। वहीं तेज हवाओं और मौसम की अन्य परिस्थितियों संबंधी चिंता भी थी, जो सफल प्रक्षेपण में बाधा बन सकती थी। देश की अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि यह परीक्षण देश की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण होगा।
देश 2030 तक चंद्रमा पर एक यान भेजने की भी योजना बना रहा है। इससे पहले 2009 में अपने पहले परीक्षण के दौरान उपग्रह को कक्षा से बाहर निकालने में विफल रहा जबकि 2010 में दूसरे परीक्षण के दौरान टेकऑफ के बाद उसमें धमाका हो गया।