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सिंगापुर: फांसी पर चढ़ाए जाने से पहले कोरोना पॉजिटिव निकला शख्स, अदालत ने लिया ये फैसला

Tue, 09 Nov 2021 08:24 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिंगापुर

सार

मादक पदार्थों की तस्करी के जुर्म में सिंगापुर की अदालत ने एक व्यक्ति को फांसी की सजा सुनाई थी। लेकिन, उसे मृत्युदंड देने से ठीक पहले वह कोरोना वायरस से संक्रमित हो गया, जिसके बाद अदालत ने फिलहाल उसकी सजा पर रोक लगा दी है। बताया जाता है कि यह व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार भी है। पढ़िए पूरा मामला...
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल
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विस्तार
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सिंगापुर की शीर्ष अदालत ने मंगलवार को भारतीय मूल के मलयेशियाई व्यक्ति की मौत की सजा पर रोक लगा दी। यह फैसला इस 33 वर्षीय शख्स के कोरोना वायरस पॉजिटिव पाए जाने के बाद लिया गया। नागेंद्रन के धर्मलिंगम नाम के इस व्यक्ति को मादक पदार्थों की तस्करी के जुर्म में बुधवार को चांगी जेल में फांसी की सजा दी जानी थी। 

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मादक पदार्थों की तस्करी के जुर्म में धर्मलिंगम को 11 साल पहले फांसी की सजा सुनाई गई थी। इसके खिलाफ उसकी आखिरी अपील पर सुनवाई के लिए उसे अपीलीय न्यायालय में लाया गया था। लेकिन कुछ देर बाद ही उसे वहां से ले जाया गया और एक न्यायाधीश ने अदालत को बताया कि धर्मलिंगम कोरोना वायरस पॉजिटिव पाया गया है।

शीर्ष अदालत ने कही ये बात, जारी रहेगी सुनवाई
इस पर न्यायाधीश एंड्र्यू फांग ने इसे अप्रत्याशित बताते हुए कहा कि अदालत का मानना है कि स्थितियों को देखते हुए धर्मलिंगम को फांसी की सजा देना उचित नहीं है। न्यायाधीश फांग ने आगे कहा कि मृत्युदंड कल के लिए नियत है, यदि वह कोविड-19 महामारी से संक्रमित है तो हमारा विचार है कि ऐसे में उसे मृत्युदंड नहीं दिया जा सकता।
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इसके साथ ही उन्होंने मामले की सुनवाई टाल दी। अगली सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं की गई है। न्यायाधीश फांग ने कहा कि जब तक सुनवाई चलेगी धर्मलिंगम को फांसी नहीं दी जाएगी। वहीं, इस बात की जानकारी अभी नहीं मिल पाई है कि धर्मलिंगम कोरोना वायरस से कब संक्रमित हुआ था और फिलहाल उसकी तबीयत कैसी है।

मानवाधिकार कार्यकर्ता कर रहे थे सजा का विरोध
धर्मलिंगम को 2009 में 42.75 ग्राम हेरोइन सिंगापुर लाने के जुर्म में 2010 में मौत की सजा सुनाई गई थी। फांसी की तारीख पास आने के साथ यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया और उसे बचाने के लिए ऑनलाइन मुहिम भी चलाई गई। उसकी माफी संबंधी एक ऑनलाइन याचिका पर 70 हजार से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं।

दुनियाभर के मानवाधिकार कार्यकर्ता इस फांसी पर रोक की अपील कर रहे थे। उसकी सजा पर रोक नागेंद्र की अपील पर सुनवाई तक रहेगी। उसके वकील एम रवि ने दलील दी थी कि मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति को मृत्युदंड देना संविधान का उल्लंघन है लेकिन अदालत ने इसे सही पाते हुए बुधवार को फांसी की तिथि सुनिश्चित की थी। 

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