सिंगापुर में भारतीय मूल के पूर्व परिवहन मंत्री एस ईश्वरप्पन ने ऑस्ट्रेलिया से लौटने के बाद अपना पासपोर्ट अधिकारियों को सौंप दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स में इस बारे में जानकारी दी है। इनमें बताया गया है कि एस ईश्वरप्पन पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं।
द स्ट्रेट्स टाइम्स अखबार ने अटॉर्नी-जनरल के चैंबर्स का हवाला देते हुए बताया कि मेलबर्न के एक अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद सिंगापुर लौटने पर ईश्वरन ने अपना पासपोर्ट सरेंडर कर दिया। ईश्वरन पर जनवरी माह में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। इसके बाद उन्हें 800,000 सिंगापुर डॉलर पर जमानत दी गई थी। जमानत पर मूल रूप से 16 फरवरी से 4 मार्च तक ऑस्ट्रेलिया में रहना था, लेकिन बाद में डॉक्टर की सलाह के बाद उन्हें ऑस्ट्रेलिया प्रवास को 12 दिनों तक बढ़ाने की अनुमति थी।
ईश्वरन पर कुल 27 आरोप हैं, जिनमें दो भ्रष्टाचार के हैं। भ्रष्टाचार के आरोप सिंगापुर जीपी और सिंगापुर टूरिज्म बोर्ड के बीच समझौतों के लिए होटल और प्रॉपर्टी टाइकून के व्यावसायिक हितों के लिए अरबपति ओंग बेंग सेंग से रिश्वत के संबंध में है। हालांकि ईश्वरन ने इस आरोपों को खारिज किया है। ईश्वरन ने जनवरी में सत्तारूढ़ पीपुल्स एक्शन पार्टी से इस्तीफा दे दिया और परिवहन मंत्री और संसद सदस्य के पद से इस्तीफा दे दिया। अभी उनका मामला सिंगापुर की हाईकोर्ट में लंबित है।
सिंगापुर से तमिलनाडु में 5,000 से अधिक जंगली कछुओं को अवैध रूप से निर्यात करने का भारतीय पर आरोप
सिंगापुर की एक अदालत में बुधवार को एक भारतीय नागरिक पर पिछले साल 5,000 से अधिक जंगली कछुओं को अवैध रूप से निर्यात करने का आरोप लगाया गया है। जंगली कछुओं को अवैध रूप से निर्यात करने वाले भारतीय की पहचान रफीक सैयद हारिज़ा अली हुसैन के रूप में हुई है। अदालत में दाखिल किए गए आरोप पत्र के मुताबिक, सिंगापुर के चांगी हवाई अड्डे से उन्होंने 5,160 लाल-कान वाले स्लाइडर, जिन्हें आमतौर पर टेरापिन के रूप में जाना जाता है, को दो बैग में भरकर तमिलनाडु के कोयंबटूर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे तक ले गए थे। इन कछुओं को सिंगापुर के वन्यजीव अधिनियम के तहत वन्यजीव माना जाता है।
आरोप पत्र में उनके खिलाफ एक और आरोप लगाया गया है। जिसमें कहा गया है कि टेरापिन्स को बैग में भरकर ले जाते समय उन्होंने यह सुनिश्चित नहीं किया कि टेरापिन्स को परेशानी तो नहीं हो रही है। इसमे कहा गया है कि जिस बैग में भरकर टेरापिन्स को ले जाया गया वे हवादार नहीं थे, जिससे उन्हें अनावश्यक पीड़ा का सामना करना पड़ा।
ऐसे में सिंगापुर के नियमों के मुताबिक, बिना लिखित मंजूरी के वन्यजीवों का निर्यात करने पर हुसैन को एक साल तक की जेल या 10,000 सिंगापुर डॉलर तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। वहीं, अगर यह साबित हो जाता है कि टेरापिन्स को अनावश्यक रूप से परेशानी हुई तो उसे एक साल तक की जेल, 10,000 एसजीडी तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।