अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद से ही अफरा-तफरी का माहौल।
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शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में दुशांबे डेक्लेरेशन को स्वीकृति दी गई। इसके मुताबिक, एससीओ के सदस्यों ने अफगानिस्तान के स्वतंत्र, निष्पक्ष, संगठित, लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण देश के तौर पर रहने का समर्थन किया। साथ ही अफगानिस्तान को आतंकवाद, युद्ध और नशीले पदार्थों से मुक्त रखने का भी आह्वान किया है।
घोषणापत्र में एससीओ के सदस्यों ने इस बात की तस्दीक की कि अफगानिस्तान में समावेशी सरकार का रहना अहम है, जिसमें अफगान समाज के सभी समुदाय, धर्मों और राजनीतिक समूहों का प्रतिनिधित्व हो।
इसी के साथ एससीओ ने दुशांबे घोषणापत्र में सभी तरह के आतंकवाद की निंदा की। सदस्य देशों ने आतंकवाद और इसकी समर्थक ताकतों को रोकने के लिए साझा प्रयास करने की बात कही। साथ ही वैश्विक मानकों को स्थापित कर मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए हो रही आतंकियों की वित्तीय मदद को रोकने का भरोसा जताया।
एससीओ के सदस्य देशों ने वादा किया कि वे आतंकवादी गतिविधियों की तैयारी और वित्तीय मदद रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों को और सख्त करेंगे और आतंकियों को सुरक्षित पनाहगाह भी नहीं मुहैया होने देंगे। इसके अलावा वे आतंकवाद, कट्टरपंथ और अलगाववाद में शामिल लोगों और संगठनों को रोकने के लिए भी सहयोग बढ़ाएंगे।