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Russia-Ukraine War: 'जेलेंस्की तैयार हैं तो मॉस्को आ सकते हैं', पुतिन ने जताई संघर्षविराम पर वार्ता की संभावना

Thu, 04 Sep 2025 07:20 AM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग

सार

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच पुतिन ने संकेत दिया कि अगर तैयारी सही हुई तो जेलेंस्की मॉस्को आकर मुलाकात कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हर देश को सुरक्षा का अधिकार है, लेकिन दूसरों की कीमत पर नहीं। पुतिन ने नाटो सदस्यता को रूस के लिए खतरा बताया और बहुध्रुवीय दुनिया की वकालत की। यूक्रेन ने प्रस्ताव को अस्वीकार्य कहा और साथ ही सात देशों की मध्यस्थता पेशकश पर जोर दिया।
 
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एससीओ सम्मेलन में बोलते रूसी राष्ट्रपति पुतिन - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर जारी गतिरोध के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने संकेत दिया है कि वह यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से मिलने को तैयार हैं। पुतिन ने कहा कि यदि बैठक अच्छी तरह तैयार की जाए और उससे सकारात्मक परिणाम निकलें, तो जेलेंस्की मॉस्को आ सकते हैं। इस बयान ने युद्ध के शांतिपूर्ण समाधान की संभावनाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
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चीन दौरे से लौटने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए पुतिन ने कहा कि उन्होंने कभी भी जेलेंस्की से मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बैठक तभी होनी चाहिए जब यह यूक्रेन के संविधान के दायरे में और सकारात्मक परिणाम देने वाली हो। पुतिन ने यह भी बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनसे इस बारे में सवाल किया था और उन्होंने इसे संभव बताया।

रूस की सुरक्षा चिंताएं और नाटो पर आपत्ति
पुतिन ने दोहराया कि हर देश को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने का अधिकार है, लेकिन किसी भी देश की सुरक्षा दूसरे देश की कीमत पर नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि यूक्रेन की नाटो सदस्यता रूस के लिए सीधी सुरक्षा चुनौती है। हालांकि, पुतिन ने यह स्पष्ट किया कि यूक्रेन को यूरोपीय संघ में शामिल होने पर रूस की उतनी कड़ी आपत्ति नहीं है, क्योंकि यह उसकी आर्थिक गतिविधियों का हिस्सा है।
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यूक्रेन का जवाब और सात देशों की पेशकश
पुतिन के बयान के तुरंत बाद यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कम से कम सात देशों ने रूस-यूक्रेन वार्ता की मेजबानी की पेशकश की है, जिनमें ऑस्ट्रिया, स्विट्जरलैंड, वेटिकन, तुर्किये और खाड़ी देशों के तीन राष्ट्र शामिल हैं। सिबिहा ने पुतिन के प्रस्ताव को जानबूझकर अस्वीकार्य बताया और कहा कि रूस वास्तविक शांति प्रक्रिया से बच रहा है।

बहुध्रुवीय दुनिया की वकालत
पुतिन ने अपने बयान में एक और अहम बात कही। उन्होंने कहा कि अब एकध्रुवीय दुनिया का अंत होना चाहिए और सभी देशों को बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए। पुतिन ने साफ कहा कि किसी एक देश को विश्व राजनीति और सुरक्षा पर हावी नहीं होना चाहिए। उन्होंने ब्रिक्स और एससीओ जैसे संगठनों को बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का प्रतीक बताया।

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भारत-चीन की अहमियत और पश्चिम पर निशाना
पुतिन ने कहा कि आज की दुनिया में भारत और चीन जैसे आर्थिक दिग्गजों की भूमिका अहम है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि रूस भी दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि आर्थिक ताकत को राजनीतिक या सुरक्षा प्रभुत्व में नहीं बदलना चाहिए। पुतिन ने पश्चिमी देशों, खासकर ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए व्यापारिक टैरिफ और रूस पर प्रतिबंधों को लेकर भी अप्रत्यक्ष हमला बोला।

मोदी से बातचीत और सकारात्मक नतीजे
पुतिन ने बताया कि एससीओ सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बातचीत बहुत सकारात्मक रही। उन्होंने कहा कि उन्होंने मोदी को अलास्का में ट्रंप के साथ हुई बातचीत की जानकारी भी साझा की। पुतिन ने कहा कि चीन यात्रा से मिले नतीजे बहुत आगे की सोच वाले हैं और इससे बहुपक्षीय सहयोग को नई दिशा मिलेगी।

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