जापान में पुतिन की इन बातों को इस बात का संकेत माना गया है कि रूस सरकार कुरील द्वीपों में जल्द ही नई आर्थिक गतिविधियां शुरू कर देगा। पर्यवेक्षकों के मुताबिक कुरील द्वीपों को लेकर विवाद दूसरे विश्व युद्ध की समाप्ति के साथ ही खड़ा हो गया था, जब दोनों देशों ने इन द्वीपों पर अपना दावा जताया। उसके बाद दोनों देशों में कई बार शांति वार्ता हुई, लेकिन इन द्वीपों का मसला कभी नहीं सुलझ सका।
योशिहिदे सुगा ने पिछले साल जापान का प्रधानमंत्री बनने के बाद कुरील द्वीपों का विवाद हल करने का इरादा जताया था। वेबसाइट रशिया टुडे के मुताबिक सुगा के बयान से रूस में ये उम्मीद जगी थी कि ये विवाद जल्द ही हल हो जाएगा। लेकिन दोनों देशों में कोई समझौता नहीं हो सका। इस बीच रूस ने इस मामले में अपना रुख सख्त कर दिया है।
पिछले साल रूस की संसद ड्यूमा में एक संवैधानिक संशोधन को पारित किया गया था, जिसमें कुरील द्वीपों को रूस का संप्रभु क्षेत्र घोषित किया गया। उसी संशोधन में यह प्रावधान भी कर दिया गया कि रूस की कोई सरकार देश के संप्रभु क्षेत्र के बारे में किसी अन्य देश से कोई समझौता नहीं कर सकती। पिछले हफ्ते व्लादीवोस्तोक में दिए अपने भाषण के दौरान इन द्वीपों पर जापान के दावे को ‘बकवास’ करार दिया था।