रूस और यूक्रेन के बीच टर्की में हुई बातचीत में प्रगति होने के बावजूद युद्धविराम का समझौता होने की राह में अभी कई रुकावटें हैं। ये राय विशेषज्ञों ने जताई है। मंगलवार को टर्की के शहर इस्तांबुल में जब रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधि मिले, तो बताया जाता है कि वहां माहौल सकारात्मक रहा। दोनों पक्षों में पिछली वार्ताओं जैसी कड़वाहट देखने को नहीं मिली।
रूसी पक्ष की तरफ से कहा गया कि यूक्रेन नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) में शामिल न होने पर सहमत हो गया है। इसके अलावा वह क्राइमिया और दोनबास इलाकों पर से अपना दावा छोड़ने पर भी राजी है। इसे देखते हुए रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव के आसपास अपनी सैनिक गतिविधियां घटा देने का फैसला किया है।
चीन के सरकार समर्थक अखबार ग्लोबल टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि इस्तांबुल में हुई वार्ता के परिणाम से कुछ पर्यवेक्षकों को अचरज जरूर हुआ है, लेकिन चीनी विश्लेषकों की ये राय है कि अंतिम युद्धविराम तक पहुंचना अभी भी बहुत कठिन लक्ष्य है। ईस्ट चाइना नॉर्मल यूनिवर्सिटी स्थित रूसी अध्ययन केंद्र में फेलॉ कुई हेंग ने ग्लोबल टाइम्स से बातचीत में रविवार को प्रकाशित जेलेंस्की के एक इंटरव्यू का जिक्र किया। उन्होंने कहा- ‘जेलेंस्की ने तटस्थता और परमाणु हथियार से यूक्रेन के दूर रहने की बात के साथ ही संप्रभुता और प्रादेशिक अखंडता की रक्षा पर भी जोर दिया है। इसका अर्थ है कि यूक्रेन दोनबास क्षेत्र पर अंतिम रूप से अपना दावा छोड़ने के लिए तैयार नहीं हुआ है।’
अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन की वेबसाइट पर छपी एक रिपोर्ट में ध्यान दिलाया गया है कि यूक्रेन ने नाटो का सदस्य न बनने की बात के साथ यह शर्त भी जोड़ी है कि उसकी सुरक्षा की लिखित गारंटी दी जाए। सीएनएन के टीकाकार टिम लिस्टर ने लिखा है कि यह पेचीदा मामला है। उन्होंने लिखा है- ‘निश्चित रूप से अभी लंबी दूरी तय करनी होगी। अभी सिर्फ सिद्धांत तय हुए हैं, लेकिन उनसे संबंधित विवरण, क्रम, और समझौते की भाषा तय नहीं हुए हैँ। ये सारे विस्फोटक पहलू हैं।’