वैज्ञानिकों का कहना है कि फाइजर, मॉडर्ना समेत अन्य कंपनियों के टीके के लिए भी इस तरह की तकनीक विकसित जल्द की जाएगी। ऑटोवैक तकनीक रोबोटिक आर्म पर आधारित है
कोरोना महामारी के बीच दुनियाभर में चल रहे टीकाकरण अभियान में टीका भी जमकर बर्बाद हो रहा है। थाईलैंड के चुलालोंगकॉर्न यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक बनाई है जिससे टीके की एक वॉयल में जितने डोज होंगे, उनका पूरा इस्तेमाल होगा।
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यूनिवर्सिटी के बायोमेडिकल रिसर्च सेंटर की वैज्ञानिक प्रो. जुथामास रत्नावरापोर्न का कहना है कि ऑटोवैक तकनीक रोबोटिक आर्म पर आधारित है। इससे ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका टीके की एक वॉयल में मौजूद 12 डोज चार मिनट में पूरी तरह निकल सकेंगे।
इस तकनीक का इस्तेमाल यूनिवर्सिटी के टीकाकरण केंद्र पर शुरू भी हो गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि फाइजर, मॉडर्ना समेत अन्य कंपनियों के टीके के लिए भी इस तरह की तकनीक विकसित जल्द की जाएगी।
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अधिक लोगों को लग सकेगा टीका
वैज्ञानिकों का कहना है कि ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका टीके के कुल 12 डोज में से अभी सिर्फ दस डोज ही इस्तेमाल हो पाते हंै। ऑटो वैक तकनीक से खराब हो रही 20 फीसदी वैक्सीन का भी इस्तेमाल संभव है।