विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप और जेमो में कई समानताएं हैं। दोनों की जिंदगी लगभग एक जैसी रही है और उनके विचार भी समान हैं। ट्रंप की तरह की जेमो की लोकप्रियता टीवी न्यूज चैनलों पर उनके बारे में लगातार कवरेज से बढ़ी है। दोनों इस बात पर जोर देते हैं कि वे पेशेवर राजनेता नहीं हैं। वे आव्रजकों के खिलाफ ट्रंप जैसी ही आक्रामक भाषा बोलते हैं।
हाल में जेमो ने मांग की कि फ्रांस में जन्म लेने वाले हर व्यक्ति के लिए कैथोलिक मत के मुताबिक नाम रखना अनिवार्य कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि उससे समाज में समरूपता बढ़ेगी। समाजशास्त्री फिलिपे कॉरकफ ने वेबसाइट पॉलिटिको से कहा- ‘अंतर सिर्फ यह है कि ट्रंप ने बुद्धिजीवियों के खिलाफ मुहिम चला रखी थी, जबकि जेमो खुद को बुद्धिजीवी मानते हैँ। फ्रांस में राष्ट्रपति बनने के लिए बौद्धिकता का लबादा ओढ़ना पड़ता है। मैक्रों ने दार्शनिक पॉल रिकॉये के साथ अपनी निकटता को प्रचारित किया था। इसलिए जेमो खुद को बैद्धिक ट्रंप के रूप में पेश करना चाहते हैँ।’
फ्रांस के एक वामपंथी अखबार में काम करने वाले पत्रकार ने पॉलिटिको से कहा- ‘संपादकीय बैठकों में जो मैं सुनता हूं, उस पर मेरे लिए विश्वास करना मुश्किल होता है। उसमें सारी चर्चा जेमो पर केंद्रित रहती है और ये मुद्दा रहता है कि उसका जवाब हमें कैसे देना चाहिए। इसके बीच हम वामपंथी उम्मीदवारों की खबर शायद ही दे पाते हैं।’
मीडिया वॉचडॉग एक्रिमेड के मुताबिक पिछले महीने जेमो को टीवी चैनलों पर 11 घंटे का समय मिला, जबकि सोशलिस्ट उम्मीदवार एनी हिदालगो को सिर्फ दो घंटे का वक्त ही मिल पाया। ली पेन को भी दो घंटे से कुछ ही ज्यादा समय दिया गया।