2018 में जब पुणे जिले के कोरेगांव भीमा में हिंसा हुई थी, परमबीर सिंह महाराष्ट्र के अतिरिक्त महानिदेशक (कानून व्यवस्था) थे और रश्मि शुक्ला पुणे की पुलिस आयुक्त थीं।
साल 2018 में भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में गुरुवार को आईपीएस रश्मि शुक्ला जांच आयोग के समक्ष पेश हुईं। लेकिन मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह आयोग के सामने पेश नहीं हुए। हालांकि पैनल के सामने पेश हुईं रश्मि शुक्ला का बयान दर्ज नहीं किया जा सका क्योंकि उन्होंने हलफनामा दायर करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था।
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रश्मि शुक्ला ने आयोग को बताया कि हिंसा से एक दिन पहले आयोजित एल्गार परिषद कार्यक्रम से संबंधित पुणे पुलिस से उन्हें अभी तक कुछ दस्तावेज प्राप्त नहीं हुए हैं। रश्मि शुक्ला के बयान की अगली तारीख अभी तय नहीं हुई है।
22 अक्टूबर को रश्मि शुक्ला और परमबीर सिंह को समन जारी किया था
कलकत्ता हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश जे एन पटेल और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव सुमित मलिक की अध्यक्षता में दो सदस्यीय जांच आयोग ने इस साल 22 अक्टूबर को रश्मि शुक्ला और परमबीर सिंह दोनों को समन जारी किया था। 2018 में जब पुणे जिले के कोरेगांव भीमा में हिंसा हुई थी, परमबीर सिंह महाराष्ट्र के अतिरिक्त महानिदेशक (कानून व्यवस्था) थे और रश्मि शुक्ला पुणे की पुलिस आयुक्त थीं।
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रश्मि शुक्ला अब केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के अतिरिक्त महानिदेशक हैं और हैदराबाद में तैनात हैं। मुंबई में एक मजिस्ट्रेट की अदालत ने बुधवार को परम बीर सिंह को उनके और शहर के कुछ अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जबरन वसूली के एक मामले में घोषित अपराधी घोषित किया। परमबीर सिंह वर्तमान में होम गार्ड्स के महानिदेशक के रूप में तैनात हैं और जबरन वसूली के कई मामलों का सामना कर रहे हैं। आखिरी बाहर वह मई में अपने कार्यालय में उपस्थित हुए थे जिसके बाद वह छुट्टी पर चले गए।