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संकल्प : जलवायु के लिए मीथेन क्यों है नुकसानदायक, 90 देश इसका उत्सर्जन घटाएंगे और जंगल बचाएंगे

Wed, 03 Nov 2021 06:24 AM IST
योगेश साहू एजेंसी, ग्लासगो।

सार

संयुक्त राष्ट्र की जलवायु कॉन्फ्रेंस में 2030 तक के लिए दो अहम दावे किए गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने कहा कि मीथेन उत्सर्जन 2020 के मुकाबले 30 प्रतिशत घटाएंगे। ब्रिटेन ने दावा किया कि दुनिया के 85 प्रतिशत जंगल कटने के बजाय बढ़ने लगेंगे।
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गैस क्षेत्र (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : social media
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विस्तार
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दुनिया के 90 देशों ने अमेरिका और यूरोपीय संघ के नेतृत्व में मीथेन उत्सर्जन 2020 के मुकाबले 2030 तक करीब 30 प्रतिशत घटाने का वादा किया है। मीथेन को कार्बन के बाद पृथ्वी के वातावरण को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने और गर्मी बढ़ाने वाली गैस माना जाता है। वहीं ब्रिटेन ने बताया कि जंगलों को काटने से रोकने के लिए 100 देशों ने समझौते की सहमति दी है। 

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इन देशों में दुनिया के 85 प्रतिशत जंगल है, 2030 तक यह जंगल कटने से न केवल रुकेंगे, बल्कि और बढ़ने लगेंगे। पृथ्वी पर जीवन बचाने की आशा जगातीं यह दोनों घोषणाएं संयुक्त राष्ट्र संघ की जलवायु कॉन्फ्रेंस की प्रमुख उपलब्धियों में गिनी जा रही हैं। मीथेन घटाने पर इससे पहले सितंबर में वैश्विक मीथेन शपथ ली गई थी, जिसमें 30 देश शामिल हैं। लेकिन इसे और बढ़ाने की बात कही जा रही थी। 

अब संख्या में ताजा इजाफा करते हुए भारत, चीन, रूस और ब्राजील जैसे बड़े देश भी इसमें शामिल होने जा रहे हैं। यही देश सबसे ज्यादा मीथेन उत्सर्जन के लिए भी जिम्मेदार कहे जाते हैं। यह मुद्दा मौजूदा कॉन्फ्रेंस का मुख्य मुद्दा नहीं था, लेकिन अब इसे आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाएगा। 
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मीथेन गैस से नुकसान क्या?
कार्बन के बाद सबसे खतरनाक कही जाने वाली मीथेन, कुछ मायनों में तो कार्बन से भी ज्यादा खतरनाक है। यह ज्यादा गर्मी संरक्षित करके रखती है, वातावरण में तेजी से फैलती है। यानी यह पृथ्वी का तापमान कार्बन की तुलना में ज्यादा तेजी से बढ़ा सकती है।

फायदा
मीथेन उत्सर्जन घटाएं तो 2040 तक पृथ्वी की तापमान वृद्धि में 0.3 डिग्री सेल्सियस तक कम की जा सकती है। अगर कमी नहीं ला पाए तो हम न केवल पेरिस समझौते के लक्ष्य हासिल करने में विफल होंगे, बल्कि औसत तापमान भी 18वीं सदी के मुकाबले 1.5 डिग्री अधिक हो जाएगा। इसका परिणाम ध्रुवों की बर्फ पिघलने और कई द्वीपों व तटीय शहरों के डूबने के रूप में सामने आएगा।

कैसे मिलेगी सफलता?
मीथेन बढ़ाने में जीवाश्म ईंधन, तेल व गैस का लीक होना, पुरानी कोयला खदानें, अनियोजित कृषि व पशुपालन और जमीन में दबाया जा रहा शहरों का कचरा प्रमुख कारण हैं। इन कारणों को बेहतर तकनीक के जरिए तेजी से रोका जा सकता है। अमेरिका इस मामले में नेतृत्व कर रहा है।

जंगलों का कटाव रोकने की कोशिश
ब्रिटेन द्वारा 100 से अधिक देशों को जंगलों का कटाव रोकने के लिए राजी करना कॉन्फ्रेंस की एक और बड़ी उपलब्धि है। इनमें ब्राजील, चीन, कोलंबिया, कांगो, इंडोनेशिया, रूस और अमेरिका प्रमुख हैं।

फायदा क्या
जंगलों को पृथ्वी के फेफड़े और कार्बन व मीथेन जैसी गैसों का नुकसान कम करने का प्रमुख स्रोत माना जाता है। लेकिन जंगल से मिलने वाली लकड़ी और पेड़ काटकर खेती करने को ज्यादा फायदेमंद मानने की प्रवृत्ति ने इनका विनाश किया है। इसे रोका गया तो पृथ्वी का वातावरण सुधारा जा सकेगा।

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