फॉसिल फ्यूल (जीवाश्म) ऊर्जा इंडस्ट्री की अहमियत अब ज्यादा दिन की बात नहीं है। यह अनुमान एक ताजा अध्ययन रिपोर्ट में जताया गया है। ये रिपोर्ट नेचर मैग्जीन में छपी है। उसमें कहा गया है कि दुनिया की आधी फॉसिल फ्यूल संपत्तियां 2036 तक मूल्यहीन हो जाएंगी। ऐसा ग्रीन एनर्जी का चलन बढ़ने की वजह से होगा। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि ये अनुमान अभी ग्रीन एनर्जी अपनाने को जो वादे विभिन्न देशों ने किए हैं, उस पर आधारित हैं। अगर देशों ने अपना वादा नहीं निभाया, तो संभव है कि ये अनुमान पूरा सच साबित ना हो।
क्या है जीवाश्म ऊर्जा
कोयला, पेट्रोलियम, गैस आदि जैसे जमीन के अंदर दबे ऊर्जा स्रोतों को जीवाश्म ऊर्जा कहा जाता है। ताजा रिपोर्ट को तैयार करने वाले अध्ययनकर्ताओं ने अपने अनुमान के साथ यह सवाल भी उठाया है कि अभी जो नौकरियां और अर्थव्यवस्थाएं जीवाश्म ऊर्जा पर निर्भर हैं, उनका अगले 15 साल में क्या होगा। ये आशंका जताई गई है कि अगर तब तक आधी जीवाश्म ऊर्जा संपत्तियां बेकार हो गईं, तो उसके परिणामस्वरूप 2008 जैसी आर्थिक मंदी आ सकती है।
अध्ययनकर्ताओं ने दुनियाभर की सरकारों को सलाह दी है कि वे कच्चे तेल और गैस की कीमतों में झटकों के लिए तैयार रहें। इसके असर को कम करने के लिए जरूरी है कि वे बीच की अवधि में उपभोक्ताओं की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अभी से कदम उठाएं। रिपोर्ट में कहा गया है कि जो देश ग्रीन एनर्जी को अपनाने की पहल करेंगे, वे फायदे में रहेंगे।
अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि अगले 15 साल में फॉसिल फ्यूल इंडस्ट्री से जुड़ी 11 से 14 ट्रिलियन डॉलर की संपत्तियां खत्म हो जाएंगी। उससे इस इंडस्ट्री में कुछ वैसे हालात पैदा होंगे, जैसा 2020 में कोरोना महामारी के आरंभिक दौर में विश्वव्यापी लॉकडाउन के दौरान देखने को मिले थे। अंतर सिर्फ यह होगा कि कोरोना से लगे झटके के बाद ये इंडस्ट्री फिर से उठ खड़ी हुईं। लेकिन भविष्य में लगा झटका स्थायी होगा।
2033 तक गायब हो जाएगा कोयला
वेबसाइट रशिया टुडे के मुताबिक कई बड़े कारोबारी यह समझ गए हैं कि अब भविष्य फॉसिल फ्यूल इंडस्ट्री का नहीं है। उद्योगपति बिल गेट्स ने कहा है कि अब इस इंडस्ट्री में निवेश करना एक बड़ी भूल साबित होगी। ग्लासगो में जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन (कॉप-26) के दौरान गेट्स ने कहा- ‘आज की बड़ी कंपनियों में से कुछ ध्वस्त हो जाएंगी। आज से 30 साल बाद इनमें से कुछ कंपनियों का मूल्य न के बराबर बचेगा।’
नेचर मैग्जीन में छपी रिपोर्ट के लेखक हेनरिक जेपसेन ने एक मीडिया इंटरव्यू में कहा कि जलवायु परिवर्तन का खतरा ऐसा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए नए निवेश के मामले में ग्रीन एनर्जी तेजी से ऊर्जा के पुराने स्रोतों की जगह ले रही है। इन्वेस्टमेंट बैंक मॉर्गन स्टेनले ने अपने एक ताजा अनुमान में संभावना जताई है कि कोयला उद्योग विकसित देशों में 2033 तक गायब हो जाएगा। कोयला का इस्तेमाल खत्म होने के बाद तेल और गैस का उपयोग शून्य होना भी सिर्फ वक्त की बात होगा। यानी ऐसा होना तय है, सवाल सिर्फ यह बचेगा कि ऐसा होने में कितना समय लगता है।