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India-Nepal: बातचीत से हो सकता है भारत और नेपाल के बीच समस्याओं का समाधान, पीएम केपी शर्मा ओली का बयान

Sat, 07 Sep 2024 09:22 PM IST
पवन पांडेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

India-Nepal: नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने शनिवार को भारत और नेपाल के बीच की समस्याओं का समाधान खुली बातचीत और सौहार्द्र से किया जा सकता है। बता दें कि नेपाल पांच भारतीय राज्यों - सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के साथ 1,850 किलोमीटर से अधिक की सीमा साझा करता है।
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भारत और नेपाल के बीच समस्याओं पर बोले पीएम ओली - फोटो : ANI
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विस्तार
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नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कहा कि नेपाल और भारत के बीच की समस्याओं को खुले संवाद और सौहार्दपूर्ण माहौल से सुलझाया जा सकता है। पूर्व प्रशासक सूर्य नाथ उपाध्याय की पुस्तक 'इंटरनेशनल वाटरकोर्स लॉ: ए पर्सपेक्टिव ऑन नेपाल-इंडिया कोऑपरेशन' के विमोचन के अवसर पर पीएम ओली ने कहा, नेपाल और भारत के बीच बहुत कम समस्याएं हैं, और अगर हम सौहार्दपूर्ण माहौल और खुले संवाद को बनाए रखें तो उन्हें सुलझाया जा सकता है।
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भारत हमारा मित्रवत पड़ोसी- पीएम ओली
पीएम ओली ने आगे कहा कि भारत हमारा मित्रवत पड़ोसी है और नेपाल और भारत की संस्कृति समृद्ध है, इसलिए हमें खुले संवाद की आवश्यकता है। हमारी खुलकर बात न कर पाने की अक्षमता के लिए केवल भू-राजनीतिक स्थिति को दोष नहीं दिया जा सकता। हमें सत्ता हासिल करने और उसे बनाए रखने के किसी भी खेल में शामिल नहीं होना चाहिए।

पहले, विदेशी संबंध देश की ताकत के आधार पर बनाए जाते थे और उन पर हावी होते थे। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, किसी देश को अपने राष्ट्रीय हितों को अंतरराष्ट्रीय संधियों और समझौतों के अनुरूप उचित और न्यायसंगत तरीके से प्रस्तुत करना चाहिए।
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2020 में भारत और नेपाल के बीच बना था तनाव
इस दौरान पीएम ओली ने जोर देकर कहा, साझा संसाधनों पर काम करते समय एकतरफा दृष्टिकोण नहीं होना चाहिए। यह आम सहमति और द्विपक्षीय चर्चा के आधार पर किया जाना चाहिए। 2020 में काठमांडू की तरफ से एक नया राजनीतिक मानचित्र प्रकाशित करने के बाद दोनों देशों के बीच संबंध गंभीर तनाव में आ गए थे, जिसमें तीन भारतीय क्षेत्रों - लिंपियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख - को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था। 

तत्कालीन प्रधानमंत्री ओली ने बढ़ते घरेलू दबाव को रोकने के लिए इस मुद्दे का इस्तेमाल करने का प्रयास किया। पीएम ओली ने अतीत में नेपाल के आंतरिक मामलों में कथित रूप से हस्तक्षेप करने के लिए भारत की सार्वजनिक रूप से आलोचना की थी। वहीं पूर्व प्रशासक सूर्य नाथ उपाध्याय ने कहा कि हिमालयी राष्ट्र को अभी तक नेपाल और भारत के प्रतिष्ठित व्यक्तियों के समूह की तरफ से तैयार की गई रिपोर्ट नहीं मिली है। 

'आम सहमति के आधार पर हुआ ईपीजी का गठन'
पूर्व नौकरशाह ने कहा, नेपाल और भारत के बीच मुद्दों को सुलझाने के लिए दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच आम सहमति के आधार पर ईपीजी का गठन किया गया था। उन्होंने कहा, नेपाली पक्ष की ओर से रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए समय का कोई मुद्दा नहीं था। शायद भारतीय पक्ष इसके लिए उचित समय की व्यवस्था करेगा, उन्होंने कहा कि हिमालयी राष्ट्र को रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद दोनों देशों के बीच लंबित मुद्दों पर चर्चा करना आसान होगा। चारों ओर से भूमि से घिरा नेपाल माल और सेवाओं के परिवहन के लिए भारत पर बहुत अधिक निर्भर करता है। नेपाल इस क्षेत्र में अपने समग्र सामरिक हितों के संदर्भ में भी भारत के लिए महत्वपूर्ण है।
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