US: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अमेरिका के सबसे पुराने हार्वर्ड विश्वविद्यालय की फंडिंग रोकने की धमकी दी है। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने विदेशी छात्रों की सूची मांगी है ताकि यह तय किया जा सके कि किन कट्टरपंथियों को अमेरिका में वापस आने से रोका जाए।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को दावा किया कि उन्हें हार्वर्ड विश्वविद्यालय से टकराव में जीत मिली है। उन्होंने एक बार फिर दुनिया के इस शीर्ष विश्वविद्यालय को मिलने वाले अरबों डॉलर के अनुदान को रोकने की धमकी दी।
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स्मृति दिवस (मेमोरियल डे) पर अवकाश के दिन ट्रंप ने अपने संदेश में कहा, 'मैं बहुत यहूदी विरोधी (एंटीसेमिटिक) हार्वर्ड से तीन अरब डॉलर के अनुदान को वापस लेने और उसे देशभर के ट्रेड स्कूलों को देने पर विचार कर रहा हूं।' स्मृति दिवस पर अमेरिका में राष्ट्रीय अवकाश होता है। इसे हर साल मई के आखिरी सोमवार को मनाया जाता है। इस दिन अमेरिकी सेना के उन जवानों को याद किया जाता है, जो देश की सेवा में अपनी जान गंवा चुके हैं।
उन्होंने एक बार फिर हार्वर्ड से विदेशी छात्रों की संख्या कम करने की बात कही। उन्होंने कहा कि वह हार्वर्ड से इन छात्रों की सूची मिलने का इंतजार कर रहे हैं। विदेशी छात्र अमेरिका के इस सबसे पुराने विश्वविद्यालय की आय का एक अहम स्रोत हैं। ट्रंप ने कहा कि वह यह सूची इसलिए चाहते हैं, ताकि वह तय कर सकें कि अरबों डॉलर के फिजूल खर्च के कितने कट्टरपंथ और उपद्रवी लोग ऐसे हैं, जिन्हें अमेरिका में वापस नहीं आने देना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, लेकिन डरने की जरूरत नहीं है, आखिर में जीत सरकार की ही होगी।
ट्रंप प्रशासन ने पिछले हफ्ते हार्वर्ड को विदेशी छात्रों के दाखिले रोकने के लिए आदेश दिया था। लेकिन शुक्रवार को एक जज ने इस आदेश को इस सप्ताह की सुनवाई तक के लिए स्थगित कर दिया। अब तक 162 नोबेल पुरस्कार विजेता देने वाले हार्वर्ड विश्वविद्यालय से ट्रंप बहुत नाराज हैं, क्योंकि उसने अमेरिकी सरकार की दाखिला और भर्ती पर कड़ी निगरानी को मानने से इनकार कर दिया था। ट्रंप का दावा है कि यह विश्वविद्यालय यहूदी-विरोधी और सचेत उदारवादी (लिबरल) विचारधारा का गढ़ है।
राष्ट्रपति ट्रंप उन अमेरिकी विश्वविद्यालयों और मीडिया जैसे अन्य संस्थाओं पर हमला कर रहे हैं, जिन्हें वह देश में वामपंथी विचारधारा की ओर झुकाव रखने वाले समझते हैं। ट्रंप ने हार्वर्ड को सरकार से मिलने वाले 9 अरब डॉलर के अनुदान की समीक्षा करने की धमकी दी है। उन्होंने पहले 2.2 अरब डॉल के अनुदान और 60 मिलियन डॉलर के सरकारी अनुबंध रोक दिए हैं। साथ ही वह हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के एक शोधकर्ता को भी देश से बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं।