हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में चीन की फुदान यूनिवर्सिटी का कैंपस खोले जाने का मामला अब देश के अंदर और बड़े सियासी टकराव में बदल गया है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि ये मसला अब अगले आम चुनाव में सबसे बड़े मुद्दे के रूप में उभर सकता है। मंगलवार को हंगरी की संसद ने यूनिवर्सिटी कैंपस के लिए जमीन आवंटित करने का प्रस्ताव पारित कर दिया।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बान और उनकी फिडस्ज पार्टी इस परियोजना के जोरदार समर्थक हैँ। जबकि विपक्षी गठबंधन इसका पुरजोर विरोध कर रहा है। विपक्षी पार्टी से जुड़े बुडापेस्ट के मेयर ने कुछ रोज महीने इस मुद्दे पर शहर में बड़े जन प्रदर्शन का नेतृत्व किया था। तब कहा गया था कि ऑर्बान सरकार ने इस मामले पर बुडापेस्ट में जनमत संग्रह कराने का फैसला किया है। विश्लेषकों ने इस फैसले के आधार पर कहा था कि अब ये मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। लेकिन सत्ताधारी पार्टी ने अब इस मामले में आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। उसने संकेत दिया है कि ये कैंपस बनवाने पर वह अडिग है।
संसद से पास विधेयक के मुताबिक यूनिवर्सिटी कैंपस के लिए सरकारी जमीन दी जाएगी। हंगरी सरकार इसके लिए बुडापेस्ट शहर के अंदर ही चार भूखंड आवंटित करेगी। उस पर दो अरब डॉलर के खर्च से चीनी विश्वविद्याल का परिसर बनेगा। इस प्रस्ताव को सत्ताधारी पार्टी के सदस्यों का संसद में भारी समर्थन मिला।
पारित बिल में कहा गया है कि चीनी विश्वविद्यालय का पूरा प्रस्ताव 2022 के अंत तक संसद के सामने अवश्य पेश कर दिया जाना चाहिए। उसके तुरंत बाद इस मुद्दे पर बुडापेस्ट के नागरिकों की राय ली जाएगी। पर्यवेक्षकों के मुताबिक अगर ऑर्बान सरकार की ये योजना कामयाब हुई तो यूरोप में किसी चीनी विश्वविद्यालय का पहला कैंपस होगा। ऑर्बान सरकार ने ये फैसला यूरोपियन यूनियन की भावनाओं को नजरअंदाज करते हुए किया है।
कई यूरोपीय देशों और हंगरी के भीतर विपक्ष का आरोप है कि प्रधानमंत्री ऑर्बान देश को चीन के बहुत करीब ले जा रहे हैं। इससे यूरोप में चीन के पांव जम जाएंगे। हाल में एक फेसबुक पोस्ट में बुडापेस्ट के मेयर ग्रेगरी कारास्कोनी ने लिखा था कि बुडापेस्ट के नागरिक सरकार की इस योजना के बारे में अपनी राय सुना चुके हैँ। यहां के 96 फीसदी लोग नहीं चाहते हैं कि उनके शहर में चीनी विश्वविद्याल का कैंपस खुले।
आरोप है कि सरकार ने जो जमीन फुदान यूनिवर्सिटी के कैंपस के लिए आवंटित करने का फैसला किया है, वहां पहले छात्रों के लिए हॉस्टल बनाने की योजना थी। कारास्कोनी ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि ऑर्बान चीनी विश्वविद्यालय के लिए हंगरी के छात्रों के हित की बलि चढ़ा रहे हैं। इसके पहले कारास्कोनी ने एलान किया था कि अगर बुडापेस्ट के स्थानीय प्रशासन को नजरअंदाज करते हुए यूनिवर्सिटी कैंपस खोला गया, तो वे कैंपस की तरफ जाने वाली सड़कों का इस रूप में नामाकरण कर देंगे, जिससे चीन खफा होगा। उन्होंने कहा था कि उन सड़कों का नाम आजाद हांगकांग रोड, उइघुर शहीद रोड, दलाई लामा रोड और बिशॉप शी शिगुआंग रोड रख दिया जाएगा।
गौरतलब है कि कारास्कोनी के अगले साल होने वाले आम चुनाव में विपक्षी गठबंधन की तरफ से प्रधानमंत्री का उम्मीदवार बनने की संभावना है। इस गठबंधन की स्थिति बेहतर मानी जा रही है।